राजकीय मेडिकल कालेज श्रीनगर मे वर्ष 2011 से 2013 के बीच एमबीबीएस सप्लीमेंटरी (अनुपूरक) परीक्षा दे चुके 72 छात्रों का परीक्षाफल अभी भी अधर में लटका हुआ है। उत्तराखंड तकनीकी विवि (यूटीयू) और मेडिकल कालेज के बीच फंसे छात्र-छात्राएं पिछले चार माह से रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं।
इस देरी का सबसे अधिक खामियाजा वर्ष 2011 बैच के 28 परीक्षार्थी झेल रहे हैं। हैरानी की बात है कि छात्रों से जुड़े मुद्दे में सरकार की ओर से अभी तक कोई हस्तक्षेप नहीं किया गया है।
यहां बता दें कि गत मई माह में 2011 बैच (अंतिम वर्ष के 28 छात्र), 2012 बैच (36 छात्र) और 2013 बैच (8 छात्र) के 72 छात्रों ने सप्लीमेंटरी परीक्षा दी थी। वर्ष 2014 तक श्रीनगर मेडिकल कालेज यूटीयू से संबद्ध था।
इसलिए रिजल्ट भी यूटीयू ने घोषित करना है। विवि ने यह कहकर परीक्षा का रिजल्ट रोक दिया कि पहले वर्ष 2008 से 2013 तक का परीक्षा शुल्क बकाया 3 लाख 67 हजार 500 रुपये जमा करवाए। यूटीयू के अनुसार, कालेज ने वर्ष 2009 से 2013 के बीच प्रति छात्र 800 रुपये कम फीस जमा करवाई है। पिछले दो तीन माह से यूटीयू और कालेज का इसी मामले को लेकर पत्राचार चल रहा है।
इस खींचतान से एमबीबीएस फाइनल वर्ष के 28 परीक्षार्थियों का भविष्य बुरी तरह से प्रभावित हो गया है। यदि रिजल्ट घोषित हो चुका होता, तो अब तक परीक्षा में उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं की इंटर्नशिप शुरू हो चुकी होती। इंटर्नशिप में देरी होने से पहले से पीछे चल रहे छात्र-छात्राएं और पीछे हो गए हैं।
यूटीयू के कुलपति से वार्ता हुई थी। उन्होंने छात्र हित में रिजल्ट घोषित करने की बात की है। उम्मीद है कि सोमवार तक कुछ न कुछ नतीजा मिल जाएगा।
प्रो. सीएमएस रावत प्राचार्य मेडिकल कालेज श्रीनगर
विवि किसी का रिजल्ट नहीं रोकता। कालेज के अधिकारी परीक्षार्थियों का डाटा और पैसों का हिसाब लेकर आ जाए। उनको रिजल्ट सौंप दिया जाएगा।
प्रो. पीके गर्ग, कुलपति यूटीयू