लैंसडौन। रावण के चरित्र का मंच पर अभिनय करना किसी तपस्या से कम नहीं। रावण के ज्ञान और बुद्धि बल, रणभूमि में युद्ध कौशल के बीच उसके अहंकार का चरित्रांकन करना वास्तव में मेरे लिए गौरव की बात है। अमर उजाला से मुलाकात में ये बात पिछले 20 वर्षों से रामलीला मंचन में रावण का अभिनय कर रहे 65 वर्षीय प्रेम बहादुर थापा ने कही।
प्रेम बहादुर थापा ने बताया कि महज 14 वर्ष की उम्र से ही वे रामलीला मंचन करते आ रहे हैं। शुरुआती सात वर्षों तक उन्होंने अंगद की भूमिका निभाई। इसके बाद 14 वर्षों तक हनुमान के किरदार को मंच पर बखूबी निभाया। प्रेम बहादुर बताते हैं कि अब वे पिछले 20 वर्षों से रामलीला के सशक्त किरदार के रूप में रावण की भूमिका निभाते चले आ रहे हैं। दरअसल रावण के किरदार को देखने के लिए खासी भीड़ भी जुटती है। जैसे-जैसे रावण की दहाड़ बढ़ती जाती है, दर्शकों को यह एहसास होने लग जाता है कि अब विजय दशमी पर्व नजदीक है।
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एक दौर में पड़ गया था दर्शकों का अकाल
करीब 50 वर्षों से रामलीला मंचन से जुड़े प्रेम बहादुर थापा 30 वर्षों से रामलीला के निर्देशक भी हैं। वे बताते हैं कि एक समय ऐसा भी आया था, जब कुछ कमियों के कारण रामलीला के दर्शक काफी कम हो गए थे। वह बड़ा कठिन दौर था। तब धैर्य और साहस से काम लिया। आज रामलीला मंचन के लिए कलाकार भी और दर्शक भी।
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हर किरदार में हरफनमौला हैं थापा
रामलीला समिति के अध्यक्ष डॉ. एसपी नैथानी बताते हैं प्रेम बहादुर थापा रावण के अभिनय में ही नहीं, हर क्षेत्र में अपना शत-प्रतिशत योगदान देते हैं। मंच तैयार कराना, रामलीला के हर दृश्य को तर्कसंगत बनाना, साउंड और लाइट के संयोजन से लेकर कलाकारों के मेकअप, उन्हें उनके किरदार में ढालना, नए कलाकारों को डायलॉग और रामलीला के संगीत के बीच तालमेल बैठाने की तकनीक समझाना। इन सभी जिम्मेदारियों को वे बड़ी जिम्मेदारी से निभाते हैं। उन्हें रामलीला का ऑल इन वन करेक्टर माना जाता है।