कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर का असर रोडवेज के कोटद्वार डिपो पर पड़ने लगा है। डिपो की कमाई घटकर आधी हो गई है। स्थिति यह है कि कई रूटों पर सवारियां नहीं मिलने से बसों का संचालन नहीं हो पा रहा है। कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के कारण दिल्ली के लिए भी सवारियां नहीं मिल पा रही है, जिससे रोडवेज को प्रतिदिन घाटा उठाना पड़ रहा है।
उत्तराखंड परिवहन निगम के कोटद्वार डिपो से सामान्य दिनों में प्रतिदिन 38 निगम और 17 अनुबंधित बसों का संचालन होता था, लेकिन कोरोना संक्रमण ने उत्तराखंड परिवहन निगम की कमर तोड़कर रख दी है। स्थिति यह है कि पर्वतीय रूटों पर पर्याप्त सवारियां नहीं मिलने के कारण पोखड़ा, जमेली समेत कई रूटों पर बसों का संचालन रोक दिया गया है। मैदानी क्षेत्रों में कुछ हालत में सुधार था, लेकिन यूपी, दिल्ली, राजस्थान, पंजाब में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने और अधिकांश क्षेत्रों में कर्फ्यू लगने के बाद यहां भी सवारियों का टोटा होने लगा। कोटद्वार डिपो से दिल्ली के लिए सामान्य दिनों में 22 बसों का संचालन होता था, जिससे निगम को प्रतिदिन करीब सात लाख से अधिक कमाई होती थी, लेकिन वर्तमान में महज 12 बसों का संचालन हो रहा है, जिससे आय भी घटकर आधी हो गई है। फरीदाबाद, जयपुर, गुडगांव, अमृतसर के लिए संचालित बसों का भी यही हाल है। इन रूटों पर भी सवारियों का टोटा है। हरिद्वार, देहरादून रूट पर केवल तीन बसें ही संचालित हो रही हैं। धुमाकोट, बीरोंखाल, झंडीचौड़ आदि रूटों पर स्थिति खराब है। परिवहन निगम के अधिकारियों की मानें तो केवल उत्तराखंड में 50 फीसदी सवारियों की शर्त के साथ सार्वजनिक वाहनों के संचालन का आदेश है, जबकि अन्य राज्यों में सामान्य रूप से बसों का संचालन हो रहा है, जिससे परिवहन निगम की कमाई प्रभावित हो रही है।
कोट
कोरोना संक्रमण काल में कई रूटों पर सवारियां नहीं मिल पा रही हैं। शुक्रवार को 55 बसों में महज 26 बसों का संचालन किया गया। पिछले कुछ दिनों में रोडवेज की कमाई घटकर तीन लाख के आसपास हो रही है। - टीकाराम आदित्य, एजीएम कोटद्वार डिपो।