दुगड्डा/कोटद्वार। लैंसडौन वन प्रभाग की दुगड्डा रेंज के वन सीमा में वन्यजीवों की दहशत वाले गांवों के ग्रामीणों को जल्द ही वन्य जीवों के आतंक से निजात मिल जाएगी। वन विभाग की ओर से इन गांवों में विशेष उपकरण लगाए जाएंगे। एनीडर्स नामक उपकरण के दायरे में आने वाले वन्यजीव उसमें लगे सैंसर की सहायता से लाइट जलने व हूटर बजने से दूर चले जाएंगे।
लैंसडौन वन प्रभाग की दुगड्डा रेंज कालागढ़ टाइगर रिजर्व वन प्रभाग (केटीआर) से सटी हुई है। वन सीमा से सटे ग्रामीण क्षेत्रों में हाथी, बाघ, गुलदार, भालू, नील गाय आदि से दहशत बनी हुई है। इन गांवों में मानव वन्यजीव संघर्ष पर नियंत्रण के लिए वन विभाग की ओर से लगातार प्रयोग किए जा रहे हैं। इसी क्रम में ग्रामीण क्षेत्र में मानव वन्यजीव संघर्ष पर अंकुश लगाने के लिए वन विभाग की ओर से परीक्षण के तौर पर एनीडर्स उपकरण का प्रयोग किया जा रहा है। एनीडर्स का आशय पशु घुसपैठ का पता लगाने और विकर्षक प्रणाली है।
क्यारी कंपनी की ओर से तैयार किये गए इस उपकरण में दो सेंसर, दो लाइट व हूटर लगे हुए हैं। उपकरण के लगे सेंसर के सौ मीटर दायरे में वन्यजीव के आने पर हूटर से आवाज होने लगेगी। साथ ही लाइटें जलने लगेंगी। जिससे वन्य जीव क्षेत्र से दूर चले जाएंगे। इस उपकरण से अन्य सुविधाएं भी मिलेंगी। हूटर का समय कम या अधिक किया जा सकता है। सौर ऊर्जा के पैनल से एनीडर्स की बैटरी चार्ज की जा सकेगी। वन्यजीवों के साथ ही मानव की आवाजाही भी उपकरण के सेंसर के संपर्क में आने पर पता चल जाएगी और लोगों को सतर्क होने का मौका मिल जाएगा।
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वन विभाग की कोटड़ी रेंज के सनेह स्थित केंद्रीय पौधशाला में एनीडर्स उपकरण का प्रयोग सफल होने के बाद दुगड्डा रेंज में पहली बार इसका प्रयोग किया जा रहा है। प्रयोग सफल होने पर योजना का विस्तार किया जाएगा।
- उमेश चंद्र जोशी, रेंज अधिकारी दुगड्डा।