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Kotdwar News: 20 वर्ष बाद फिर से जीवंत हो उठा शेरा गांव का सोमनाथ मेला

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बैजरो/बीरोंखाल। आखिरकार समय और परिस्थितियां बदलीं और एक बार फिर शेरा गांव में लगने वाला परंपरागत सोमनाथ मेला फिर से जीवंत हो उठा। 20 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद सोमवार को मेले का आयोजन हुआ, तो लोक परंपराएं फिर से जीवंत हो उठीं।
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पूर्वी नयार नदी पर बने भगवान शिव के मंदिर में इस वर्ष परंपरागत मेले को ध्यानपाल गुसाईं, शिशुपाल रावत, महावीर सिंह गुसाईं, अनिल रावत और संजय पटवाल आदि ने मिलकर पुनर्जीवित किया। 20 वर्षों की लंबी अवधि के बाद फिर से शुरू हुए मेले को भव्यता देने के लिए ग्राम सभा भाखंड, शेरा तल्ला मल्ला, ककरोड़ा, कोटली, भोराड़ व ग्राम गुरिंडा के ग्रामीण न केवल मेले का हिस्सा बने, बल्कि बैंडबाजे के साथ लोक परंपराओं को निभाया और मंदिर में पूजा-अर्चना की। सामाजिक कार्यकर्ता ध्यानपाल गुसाईं ने बताया कि अगले वर्ष मेले का आयोजन और भी भव्य तरीके से किया जाएगा। मेले में शामिल बच्चों व महिलाओं ने परंपरागत व्यंजनों का भी लुत्फ उठाया।
पहाड़ में सदियों से मेलों के आयोजन की सामाजिक व धार्मिक परंपराएं रही हैं। संसाधनों और सुविधाओं के अभाव में मेले दूर होते जा रहे थे। दूर-दूर से लोग मेलों में आकर अपने परिजनों व सगे-संबंधियों के साथ समय गुजारते थे। सुविधाएं और संसाधन विकसित होने के साथ ही आधुनिकता और लोगों के पलायन का असर परंपरागत सोमनाथ मेले पर भी पड़ा था। अब एक बार फिर से कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने संयुक्त प्रयास कर सोमनाथ मेले को जीवंत रूप दिया है। उन्होंने क्षेत्र के लोगों से मेले का हिस्सा बनकर इसे पुन: नई पहचान दिलाने की अपील की।
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