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जागि जा रे मेरा गुरुगोखनाथा सिद्धबली बाबा रे...

Sun, 06 Dec 2015 07:18 PM IST
कोटद्वार
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सिद्धबली मेले के अंतिम दिन गुरुगोरखनाथ, भगवती, नरसिंग और नागराजा के जागरों से सिद्धों का डांडा गुंजायमान हो गया। जैसे ही जागरी मदन लाल ने आपने वाद्य यंत्र डौंर-थाली में जागरों की तान छेड़ी वैसी ही कई महिला और पुरुष पाश्वों पर अलग-अलग देवता प्रकट हो गए। इससे पूरा सिद्धबली परिसर देवमय हो गया।
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रविवार सुबह सिद्धबली महोत्सव के अंतिम दिन ज्योतिषाचार्य देवी प्रसाद भट्ट के सानिध्य में वेद पाठियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पिंडी महाभिषेक किया। इसके बाद एकादश कुंडीय यज्ञ में मेला संयोजक उद्योगपति अनिल कंसल के अलावा मंदिर समिति के सभी पदाधिकारियों और अनेक श्रद्धालुओं ने पूर्णाहुति डालकर भगवान श्री सिद्धबली बाबा से देश में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

इसके बाद एकादश हवन कुंड परिसर में जागरों का आयोजन किया गया। इसमें मदनलाल जागरी के नेतृत्व में गाजरी किशन लाल ने जागरों की धुन और डौंर, थाली की छनकार से वहां उपस्थित कई पाश्वों पर माता भगवती, नरसंग, नागराजा, गुरु गोरखनाथ, सिद्धबाबा के रूप में देवता प्रकट हो गए। उसके बाद सिद्धबली मंदिर के बाबा रामनाथ पर बाबा गुरुगोरखनाथ सिद्धबली बाबा प्रकट होकर नाचने लगे। करीब एक घंटे तक चले जागरों में पूरा परिसर देवमय बना रहा है। हजारों की संख्या में लोग जागरों को देखने के लिए एकत्र हुए। प्रकट हुए देवों से आशीर्वाद लेने के लिए लोगों में मारामारी मची रही।
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सवा मन रोट का चढ़ा प्रसाद
वर्षों से मंदिर की परंपरा के अनुसार जागरों के बाद परिसर में सवा मन का रोट बाबा राम नाथ और उनके सहयोगियों ने गरम अंगारों में तैयार किया। महंत दिलीप रावत ने विधि-विधान से रोट-काटा और बाबा राम नाथ ने सिर पर प्रसाद ले जाकर श्री सिद्धबली बाबा को भोग चढ़ाया। रोट का प्रसाद चढ़ाने के बाद उसे लोगों में वितरित किया गया। इस बीच रोट का प्रसाद लेने के लिए लोगों में मारामारी मची रही।

सड़क खचाखच, लाखों ने किए दर्शन
महोत्सव के आखरी दिन श्री सिद्धबली बाबा के दर्शनों को श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। आलम यह था कि राष्ट्रीय राजमार्ग से सिद्धबली मंदिर तक पूरी सड़क खचखच भरी रही। मंदिर में लाखों श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन किए। यही हाल भंडारे का रहा लोगों ने सुबह से ही घंटों लाइन पर लगकर भंडारा गुहण किया।

ऑस्ट्रीया की बाला को भाई गढ़वाली संस्कृति
गढ़वाली लोक संस्कृति पर रिसर्च कर रही बियाना आस्ट्रीया की युवती कतरीना भी सिद्धबली बाबा के महोत्सव के अभिभूत हुई। उसने पूरे जागर में लोंगों ढौर-थाली पर नाचते देखा, सिद्धबली बाबा पर लोगों की आस्था से वह दंग रह गई। उसने कहा कि भारत की भक्ति भावना ही लोगों को जोड़े हुए है। उसने सिद्धबली के चरणों में शीश नवाया।

गढवाल राइफल्स के जवानों ने बाबा के दरबार में दी सेवा
मेले के आखिरी दिन उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रण करने के लिए नायब सूबेदार नरेंद्र सिंह के नेतृत्व में गढ़वाल राइफल्स के करीब 50 जवानों की टुकड़ी ने मंदिर जाने के रास्तों और भीड़ को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी संभाली। आर्मी के जवान मंदिर के मुख्य द्वार से मंदिर परिसर पर सीढ़ियों में खड़े होकर लोगों के आने जाने के लिए व्यवस्था बनाई। भंडारे में भीड़ नियंत्रण करने के लिए वे दिन भर जुटे रहे। 
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