कोटद्वार/धुमाकोट। जसवंतगढ़ जिला निर्माण संघर्ष समिति के बैनर तले नैनीडांडा, बीरोंखाल, थलीसैंण, पोखड़ा, रिखणीखाल और अल्मोड़ा के सल्ट ब्लॉक को मिलाकर पृथक जसवंतगढ़ जिला निर्माण की मांग को लेकर जनसंवाद यात्रा का दूसरा चरण शुरू हो गया है। जनसंवाद यात्रा का उद्देश्य लोगों को पृथक जिला निर्माण के लिए संघर्ष को तेज कर प्रदेश सरकार पर दबाव बनाना है। जनसंवाद यात्रा का समापन 17 फरवरी को धुमाकोट में होगा।
समिति के सहसचिव महेंद्र सिंह कंडारी ने बताया कि बुधवार को मुंस्याखाद के ग्वेल भैरों मंदिर में पूजा के बाद शुरू हुई यह जनसंवाद यात्रा खाल्यूडांडा, सिलमोड़ी, किल्बौखाल, टकोलीखाल, खंदवारी होते हुए देर शाम रिखणीखाल पहुंच गई है। यहां रात्रि विश्राम के बाद अगले दिन 13 फरवरी को यात्रा बीरोंखाल ब्लॉक के दुनाव बाडियूं पहुंचेगी।
14 फरवरी को यात्रा थलीसैंण, 15 फरवरी उफरैंखाल, 16 फरवरी को अल्मोड़ा जिले के सल्ट ब्लॉक के मौल्याखाल, ज्ञशिखाल पहुंचेगी। यात्रा का समापन 17 फरवरी को धुमाकोट में दोपहर 12:00 बजे होगा। जनसंवाद यात्रा में समिति के अध्यक्ष कर्नल राजदर्शन सिंह रावत (से.नि.), वरिष्ठ उपाध्यक्ष कर्नल रामरतन नेगी (से.नि.), उपाध्यक्ष सेवानिवृत्त कैप्टन जीएस नेगी, नैनीडांडा के अध्यक्ष रामनिवास रावत, संयोजक आरपी ध्यानी, सहसचिव महेंद्र कंडारी, सचिव उपदेश बिष्ट, प्रचार सचिव शिशुपाल रावत, जसवंतगढ़ शिक्षा मित्र संगठन के जीएस बिष्ट समेत 12 लोगों की टीम शामिल है।
.
तीन दशक से चल रही जसवंतगढ़ जिले की मांग
जसवंतगढ़ जिला बनाने की मांग तीन दशक से चली आ रही है। सर्वप्रथम 1991 में नैनीडांडा नाम से अलग जिला बनाने की मांग उठी थी। तब अविभाजित यूपी सरकार के समक्ष मांग रखी गई थी। 1996 में कई जिले बने थे, तब भी मांग उठी थी, लेकिन तब उनकी मांग की अनदेखी हुई। तब यह कहा गया कि पौड़ी गढ़वाल को हटाकर कोटद्वार जिला बनाया जाएगा, उसमें मुख्य रूप से इस क्षेत्र को शामिल किया जाएगा, लेकिन ना ही कोटद्वार जिला बन सका और ना ही जसवंतगढ़ की मांग पूरी हुई। 15 अगस्त, 2011 में तत्कालीन निशंक सरकार ने राज्य में चार नए जिले डीडीहाट, रानीखेत, कोटद्वार और यमुनोत्री को जिला बनाने की घोषणा की थी, लेकिन यह घोषणा धरातल पर नहीं उतरी।