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बारिश से रोड कटिंग का मलबा कोइराला खोला गांव में घुसा

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शनिवार रात को हुई बारिश से खेतू-केदारगली-बीरोंखाल मोटर मार्ग निर्माण का मलबा सिंदूरी मल्ली गांव के तोक कोइराला खोला में पहुंच गया, जिससे ग्रामीणों की फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। साथ ही पेयजल स्रोत भी मलबे में दब गया है, जिससे गांव में पेयजल की समस्या उत्पन्न हो गई है।
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ग्राम प्रधान दिलबर सिंह, ग्रामीण कुलदीप सिंह रावत, मनवर सिंह, सौरव सिंह, अनिल सिंह, संगीता देवी ने कहा कि लोनिवि बैजरो द्वारा छह माह पहले खेतू-केदारगली-बीरोंखाल रोड कटिंग की गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि उनके विरोध के बावजूद कार्यदायी संस्था ने रोड कटिंग के मलबे को डंपिंग जोन में न डाल कर मलबे को सिंदूरी मल्ली के कोइराला खोला गांवों के खेतों की तरफ डाल दिया था। नतीजतन शनिवार रात को हुई तेज बारिश से सारा मलबा बहकर नीचे खेतों में आ गया है, जिससे किसानों की मंडुवे, झंगोरे की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। मलबे में दबकर कोइराला खोला सिंदूरी का पेयजल स्रोत भी क्षतिग्रस्त हो गया है, जिससे गांव में पेयजल संकट उत्पन्न हो गया है और ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। ग्राम प्रधान दिलबर सिंह रावत ने लोनिवि बैजरो से ग्रामीणों को हुए नुकसान का मुआवजा देने, पेयजल स्रोत को बनाने और दोषी ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
मामला संज्ञान में है। गांव का स्थलीय निरीक्षण का नुकसान का जायजा लिया जाएगा। साथ ही खेतों और पेयजल स्रोत में जमा मलबे को जल्द हटा दिया जाएगा।
- तसलीम अहमद, सहायक अभियंता, लोनिवि बैजरो।
फुलणसैंण-सीला चुंडई मार्ग पर मलबे में फंसा ट्रक, आवाजाही ठप
दुगड्डा। शनिवार रात को हुई भारी बारिश से फुलणसैंण-सीला-चुंडई मोटर मार्ग पर सीला के निकट पहाड़ी से मलबा आ गया, जिससे ट्रक फंसने से आवाजाही ठप हो गई है।
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ज्येष्ठ उप प्रमुख अजयपाल रावत, सुधीर असवाल ने बताया कि ट्रक फंसने से मार्ग पर पूरे दिनभर यातायात प्रभावित रहा। ग्रामीणों ने बताया कि लैंसडौन के ग्रामीणों की सुविधा के लिए वर्ष 2005-06 में फुलणसैण सीला चुंडई 16 किमी. मोटर मार्ग को स्वीकृति प्रदान की गई। मोटर मार्ग के यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र का करीब तीन किमी का हिस्सा कच्चा है। बारिश होने पर सड़क में जलभराव व मलबा जमा होने से वाहनों की आवाजाही ठप हो जाती है। ग्रामीणों ने सड़क के डामरीकरण की मांग उठाई है। एई सुदेश कुमार बिंजोला का कहना है कि मार्ग के डामरीकरण के लिए शासन को दो बार प्रस्ताव भेजा गया, लेकिन स्वीकृति नहीं मिल पाई। संवाद
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