लैंसडौन। छावनी क्षेत्र के लीज भवनों की लीज रेंट में हुई बढ़ोतरी से छावनी क्षेत्र के लीजधारकों में रोष व्याप्त है। छावनी परिषद ने लोगों को एक वर्ष पूर्व लीज रेंट में बढ़ोतरी की धनराशि जमा करने के नोटिस जारी किए थे। कुछ लीजधारकों ने बढ़ी दर की धनराशि जमा कर दी थी, लेकिन अधिकांश लीज धारकों ने अब तक धनराशि जमा नहीं की है।
लीज धारकों देवेंद्र वर्मा ने बताया कि उनकी दो प्रॉपर्टी में से एक प्रॉपर्टी की लीज 11 रुपये वार्षिक थी, जो बढ़ाकर 5.85 लाख रुपये वार्षिक लीज रेंट का निर्धारण किया गया है, जबकि दूसरी प्रॉपर्टी का लीज रेंट 23 रुपये वार्षिक से बढ़ाकर 29 हजार रुपये वार्षिक किया गया है। अनूप जोशी ने बताया कि उनकी वार्षिक लीज में कई सौ गुना वृद्धि कर वार्षिक लीज रेंट का निर्धारण 1,85,250 रुपये किया गया है। नगर की व्यापारिक गतिविधियां चौपट हो गई हैं। सरकारी कार्यालय धीरे-धीरे खिसकने से व्यापार पर इसका असर पड़ा है। उनका कहना है कि छावनी परिषद की ओर से इन स्थितियों में लीज रेंट में की गई बढ़ोतरी जनहित के विपरीत है।
वहीं, छावनी परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. एसपी नैथानी ने लीज निर्धारण नीति को जनविरोधी बताते हुए इसका विरोध किया है। उनका कहना है की लैंसडौन बाजार की तुलना मुंबई के हिसाब से कर लीज का निर्धारण किया गया है। चौपट होते व्यापार से लोग पहले ही आर्थिक मार से जूझ रहे हैं। उन्होंने रक्षा मंत्रालय से लीज रेंट में की गई बढ़ोतरी को वापस कर पूर्व की तरह लीज निर्धारण करने की गुहार लगाई है।
रक्षा मंत्रालय से मिले निर्देशों के तहत लैंसडौन सदर बाजार स्थित लीज भवन की प्रति 10 वर्गमीटर की लीज का निर्धारण 24.20 रुपये एवं अन्य जगहों पर स्थित भवनों के लीज रेंट का निर्धारण अलग अलग किया गया है। -मोहम्मद साकिब आलम, मुख्य अधिशासी अधिकारी, छावनी परिषद लैंसडौन।