पाबौ। पाबौ विकासखंड के सैंजी गांव में बीते माह छह अगस्त को आई आपदा ने ग्रामीणों की जिंदगी को बदल दिया। गांव के 16 परिवारों के मकान मलबे में दबकर पूरी तरह तबाह हो गए। एक माह बीतने के बाद भी कई परिवार आज भी बेघर हैं और स्वास्थ्य केंद्र के कमरों में शरण लिए हुए हैं। प्रशासन व सरकार की ओर से प्रत्येक परिवार को पांच लाख की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है, साथ ही मवेशियों की क्षति पर मुआवजा राशि, बिजली व जल संस्थान की ओर से पेयजल की व्यवस्था और राहत सामग्री सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से लगातार उपलब्ध कराई जा रही है। फिर भी पीड़ित परिवारों की पीड़ा कम नहीं हुई है।विश्वंभरी देवी और कबूतरी देवी बताती हैं कि वह एक माह से स्वास्थ्य केंद्र में अपने परिवार के साथ रह रही हैं। उनका कहना है कि पांच लाख की राशि से दोबारा मकान बनाना असंभव है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि उन्हें कम से कम दो कमरों का पक्का मकान उपलब्ध कराया जाए ताकि वे फिर से अपनी दिनचर्या सामान्य कर सकें।
इसी तरह नीलम सिंह बताते हैं कि आपदा में उनका सब कुछ उजड़ गया। नवंबर में बेटे का विवाह तय था, लेकिन अब बेघर होने के कारण विवाह संपन्न कराना संभव नहीं दिख रहा। उन्होंने राहत राशि बढ़ाने की मांग की ताकि दोबारा घर बना सकें और बेटे का विवाह भी करवा सकें।
ग्राम प्रधान रेखा देवी ने कहा कि प्रशासन और सरकार की ओर से तत्काल राहत देने का प्रयास किया गया है और सामाजिक संस्थाओं ने भी हरसंभव सहयोग किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार आगे भी मदद का हाथ बढ़ाएगी ताकि प्रभावित परिवारों को स्थायी रूप से बसाया जा सके।