कोटद्वार। कोतवाली पुलिस की ओर से फर्जी सहकारी समिति एलयूसीसी के नाम पर उत्तराखंड में 92 करोड़ व देशभर में 189 करोड़ के ठगी के खुलासे के बाद उत्तराखंड में कंपनी के खिलाफ 45 मुकदमें दर्ज हो चुके हैं। उत्तराखंड में कंपनी की 35 शाखाएं संचालित हो रही थीं। इसी को देखते हुए कोतवाली पुलिस ने अब इस मामले में एसआईटी जांच की सिफारिश एसएसपी पौड़ी से की है।बीते वर्ष जून, 2024 में शिवपुर निवासी तृप्ति ने मामले में कोतवाली पुलिस को तहरीर दी थी। जिसमें उसने लोनी अरबन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी (एलयूसीसी) दुगड्डा शाखा के मैनेजर विनीत सिंह और कैशियर प्रज्ञा रावत पर आरडी खुलवाने के नाम पर धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया।
कहा कि उन्होंने पैसे ले लिए हैं, लेकिन उन्हें इसका कोई बांड दिया है और न ही उनके पैसे जमा किए हैं। कोतवाली पुलिस ने मामले में धोखाधड़ी, बर्ड्स एक्ट और यूपीआईडी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था। एसएसपी के निर्देश पर पुलिस टीम का गठन किया। गठित पुलिस टीम ने 28 अक्तूबर, 2024 को मामले में उर्मिला बिष्ट, जगमोहन सिंह बिष्ट, प्रज्ञा रावत, विनीत सिंह, गिरीश चंद्र बिष्ट को गिरफ्तार कर लिया था। जबकि एक अन्य आरोपी चंदराम राजपुरोहित को गत 6 फरवरी, 2025 को दिल्ली से गिरफ्तार किया।
कोतवाल रमेश तनवार के अनुसार एलयूसीसी की उत्तराखंड में 35 शाखाएं संचालित हो रही थी। जिसमें उत्तराखंड में लोगों से 92 करोड और देशभर में 189 करोड़ की धोखाधड़ी की है। कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा 2018 व 2023 में 200 फर्जी सोसाइटी व कंपनियों की सूची जारी की गई थी, जिसमें एलयूसीसी भी शामिल थी। कहा कि अब तक उत्तराखंड में कंपनी के खिलाफ धोखाधड़ी के 45 मुकदमें दर्ज हो चुके हैं। मामले की वृहद स्तर पर जांच के लिए एसएसपी पौड़ी से एसआईटी जांच कराने की संस्तुति की गई है।