वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर ऋषभ ने कैमरे में कैद किए तीन मार्टन, आठ मीटर लंबी छलांग लगा सकता है 70 सेंटीमीटर का जीव
लैंसडौन। हिमालय, दक्षिण-पूर्व और पूर्वी एशिया में पाया जाने वाला दुर्लभ प्रजाति का वन्यजीव है मार्टन। पीली गर्दन वाला यह वन्यजीव इन दिनों लैंसडौन वन प्रभाग में दिखाई दे रहा है। वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर ऋषभ माहरा ने ऐसे तीन मार्टन को कैमरे में कैद किया है। पिछले कुछ समय से मार्टन की फोटोग्राफी के लिए कई फोटोग्राफर लैंसडौन वन प्रभाग क्षेत्र में आ रहे हैं।
लैंसडौन पर्यटन गाइड एवं फोटोग्राफर ऋषभ माहरा ने बताया कि इसका शरीर चमकीले पीले-सुनहरे रंग का है। इसका सिर व पीठ स्पष्ट रूप से गहरे रंग के हैं। जिसमें काला, सफेद, सुनहरा-पीला और भूरा रंग मिश्रित होता है। यह नीलगिरी मार्टन के बाद दूसरा बड़ा मार्टन है। इसकी पूंछ शरीर की लंबाई के आधे से अधिक होती है।
इसका निवास क्षेत्र काफी विशाल होता है और वह सक्रिय रूप से अपने क्षेत्र में गश्त करता है। वह 24 घंटे में 5 मील की दूरी तय करने के लिए जाना जाता है। यह मुख्य रूप से जमीन पर शिकार करता है लेकिन पेड़ों के बीच 8 से 9 मीटर तक की छलांग लगाने में सक्षम है। मार्टन मस्टेलिडे परिवार का सबसे छोटा मांसाहारी स्तनपायी जीव है।
यह नेवला व ऊदबिलाव श्रेणी में आता है। यह छोटे स्तनधारी जीवों चूहे, खरगोश, पोल कैट, पक्षियों का शिकार करता है और फल भी खाता है। इसका वजन एक से डेढ़ किलोग्राम तक होता है। इसकी लंबाई मुंह से पूंछ तक 60 से 70 सेमी तक होती है। इसकी दो प्रजाति पाइन मार्टन व स्टोन मार्टन होती है। दोनों ही विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गई हैं।
वन्यजीवों के जानकार वन प्रभाग में कार्यरत चंद्रप्रकाश बताते हैं कि बहुमूल्य फर वाले इस स्तनपायी के कान गोल, पैर छोटे, शरीर लंबा होता है। पांव के तलवों में मोटा फर होता है। पूंछ घनी होती है, जिसकी मदद से यह जीव पेड़ों पर आसानी से चढ़कर अपना शिकार करता है।