लंबे इंतजार के बाद मेडिकल कालेज के रेडियो-डायग्नोसिस विभाग में एक सहायक प्रोफेसर और एक सीनियर रेजीडेंट चिकित्सकों ने दिसंबर माह में कार्यभार ग्रहण कर लिया था। कुछ दिन पहले सहायक प्रो. डा. वेकेंट राव ऐरोनी के नाम से अल्ट्रासाउंड मशीन संचालन का लाइसेंस भी जारी हो गया। इससे आस बंधी थी कि व्यवस्था कुछ पटरी पर आएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
विशेषज्ञ चिकित्सक होने के बावजूद मरीजों को अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन लाभ नहीं मिल पा रहा है। कारण सीटी स्कैन मशीन लगभग चार माह से खराब है तो अल्ट्रासाउंड मशीन चार साल से बंद हैं। इन चार सालों में यह मशीन जुलाई 2015 में मात्र तीन-चार दिन ही चली। जब विभाग में आठ दिनों तक एक प्रोफेसर ने सेवा दी थी। मशीनों के बंद होने से रेडियोलॉजिस्ट अल्ट्रासाउंड व स्कैन नहीं कर पा रहे हैं।
सीटी स्कैन मशीन पुरानी हो गई थी। नई मशीन खरीदने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। जबकि अल्ट्रासाउंड मशीन की सर्विसिंग की कार्रवाई चल रही है।- डा. सुरेश जैन, चिकित्सा अधीक्षक बेस अस्पताल