बदहाल सड़क से आवाजाही बनी हुई है खतरनाक
भातखाल-गजवाड़ मार्ग हुआ खस्ताहाल, डामर उखड़ने से आवाजाही में दिक्कत
दुगड्डा (कोटद्वार)। जयहरीखाल ब्लॉक में भातखाल-गजवाड मोटर मार्ग की स्थिति खराब है। वन भूमि का हस्तांतरण नहीं हुआ है। इससे भातखाल से बांसी गांव तक एक किलोमीटर हिस्से का डामरीकरण एक दशक बाद भी नहीं हो पाया है। इससे वाहनों की आवाजाही के दौरान धूल उड़ती है और मुसाफिरों को परेशानी होती है। वहीं बांसी गांव से आगे भी कई जगहों पर डामर उखड़ने से आवाजाही खतरनाक हो गई है। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि शिकायत के बावजूद लोनिवि दुगड्डा डामरीकरण नहीं कर रहा है।
ब्रिटिश शासनकाल में भातखाल से बांसी तक यह कच्चा वन मोटर मार्ग चूना पत्थर के ढुलान के लिए उपयोग होता था। वन अधिनियम लागू होने के बाद खनन पर प्रतिबंध लगा। तभी से ग्रामसभा बांसी के अंतर्गत बांसी, बोरगांव, बटलबाड़ी, ग्राम पंचायत गजवाड़ के गजवाड़, अखलैंणा, घिल्डियाल गांव के ग्रामीण लगातार इन गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने की मांग करते आ रहे थे। ग्रामीणों की मांग पर 2005-06 में भातखाल से धूमखाल तक तीन किलोमीटर मार्ग स्वीकृत हुआ। लोनिवि दुगड्डा ने 68 लाख रुपये की लागत से इसका निर्माण कराया। बाद में इसे गुरु गोरखनाथ मंदिर तक तीन किलोमीटर और बढ़ाया गया।
मार्ग का शुरुआती एक किलोमीटर हिस्सा आरक्षित वन क्षेत्र में है। डेढ़ दशक पूर्व केंद्र सरकार ने वन्यजीवों की तस्करी की आशंका के कारण भूमि हस्तांतरण का प्रस्ताव निरस्त कर दिया था जिससे इसका डामरीकरण अभी तक नहीं हो पाया है। ग्रामीण जगमोहन सिंह, बृजमोहन सिंह, भारत सिंह, सूरजपाल सिंह सहित अन्य ने डामर उखड़ने और जलभराव की समस्या बताई है। उन्होंने जनहित में मार्ग के डामरीकरण की मांग की है।
डेढ़ दशक पूर्व केंद्र सरकार ने वन्यजीवों की तस्करी की आशंका के कारण भूमि हस्तांतरण का प्रस्ताव निरस्त कर दिया था जिससे शुरुआती एक किमी. हिस्सा कच्चा है। गोरखनाथ मंदिर से सेंधीखाल के गुनेथा गांव तक तीन किलोमीटर मार्ग विस्तारीकरण की डीपीआर बन रही है। जिससे यह मार्ग सेंधीखाल में स्टेट हाईवे से जुड़ सकेगा।
- कंचन मुयाल, एई लोनिवि दुगड्डा।