कोटद्वार। दुगड्डा ब्लॉक के घाड़ क्षेत्र स्थित पुलिंडा गांव के विस्थापन की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। दशकों से भूस्खलन की समस्या से जूझ रहे गांव के लोगों को अब तक सुरक्षित ठिकाना नहीं मिल पाया है। विस्थापन एवं पुनर्वास संघर्ष समिति के अध्यक्ष केशर सिंह नेगी ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर गांव के विस्थापन की प्रक्रिया जल्द शुरू कराने की मांग की है।
कोटद्वार-रामड़ी-बल्ली मार्ग पर स्थित पुलिंडा गांव वर्ष 1971 से भूस्खलन की चपेट में है। खतरे को देखते हुए कई परिवार गांव छोड़कर पलायन कर चुके हैं, जबकि करीब 70 परिवार आज भी जान जोखिम में डालकर रहने को मजबूर हैं। गांव के कुल 121 परिवारों का विस्थापन प्रस्तावित है।
राज्य गठन के बाद ग्रामीणों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी के सामने भी यह मामला उठाया था। उनके निर्देश पर तत्कालीन मंडलायुक्त सुभाष कुमार ने गांव का निरीक्षण किया था। उस दौरान लैंसडौन वन प्रभाग ने पापीडांडा खाम में राजस्व भूमि उपलब्ध होने की जानकारी दी थी। मंडलायुक्त के निर्देश पर तत्कालीन एसडीएम एचएस मर्तोलिया ने अधिकारियों के साथ भूमि का निरीक्षण कर विस्थापन का प्रस्ताव शासन को भेजा था लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी।
2013 में पहली श्रेणी में शामिल था गांव
समिति अध्यक्ष नेगी के अनुसार वर्ष 2013 में पौड़ी जिले की आठ तहसीलों के 38 गांवों को विस्थापन के लिए चिह्नित किया गया था। इनमें पुलिंडा को पहली श्रेणी में रखा गया था। अन्य आठ जिलों के 1086 परिवारों का जून 2021 तक विस्थापन किया जा चुका है। उन्होंने पौड़ी जिले के प्रभावित गांवों के साथ भेदभाव का आरोप लगाते हुए वर्ष 2010 से 2013 के बीच सूचीबद्ध और छूटे हुए गांवों का भी पुनर्वास कराने की मांग की है।
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पुलिंडा गांव के विस्थापन के लिए पूर्व में प्रस्ताव भेजे गए थे। वर्तमान में कोई प्रस्ताव नहीं भेजा गया है।
- संदीप कुमार, एसडीएम कोटद्वार।