कण्वघाटी/कोटद्वार। लालढांग चिल्लरखाल मार्ग निर्माण की मांग के लिए क्षेत्रवासियों ने बृहस्पतिवार को लगातार छठवें दिन चिल्लरखाल वन बैरियर के समीप प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने लालढांग चिल्लरखाल मोटर मार्ग के साथ ही कोटद्वार कालागढ़ रामनगर कंडी मार्ग के निर्माण की मांग उठाई। उधर, कोटद्वार में पूर्व सैनिक संघर्ष समिति ने लालढांग-चिलरखाल समेत कोटद्वार-रामनगर मार्ग (कंडी मार्ग) के निर्माण की मांग उठाई है। उन्होंने इस संबंध में एसडीएम सोहन सिंह सैनी के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन भेजा है।
चिल्लरखाल में यूकेडी नेता महेंद्र रावत, जगदीपक रावत, इंदु नौटियाल, ध्यान सिंह बिष्ट, रघुवीर सिंह बिष्ट, विजयपाल सिंह मेहरा, पूनम मेहरा, संजय सती, रेखा सती समेत सैकड़ों लोगाें ने धरना प्रदर्शन में हिस्सा लिया। कहा कि लालढांग-चिलरखाल-कोटद्वार-कालागढ़ रामनगर मार्ग पर आजादी से पहले से गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के लोग आवाजाही करते रहे हैं। इस मार्ग के निर्माण में वन एवं वन्यजीव कानून की जटिलताएं बाधक बन रही हैं। जबकि पहाड़ के लोग पर्यावरण के सबसे बड़े पुरोधा हैं। कानूनों को शिथिलकर केंद्र व राज्य सरकार को सड़क निर्माण का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए।
उधर, कोटद्वार में पूर्व सैनिक संघर्ष समिति के अध्यक्ष महेंद्र पाल सिंह रावत, अनुसूया प्रसाद सेमवाल, गोपाल सिंह, विजेंद्र सिंह, ठाकुर सिंह और नंदन सिंह आदि ने एसडीएम के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा। पूर्व सैनिकों ने कहा कि उत्तराखंड की सीमाएं नेपाल और तिब्बत से मिलती है। उत्तराखंड में भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून, लैंसडौन में गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंटल सेंटर व रानीखेत में कुमाऊं रेजीमेंटल सेंटर स्थित हैं। वर्तमान में इन प्रशिक्षण अकादमियों को जोड़ने के लिए उत्तराखंड में बहुआयामी सड़क उपलब्ध नहीं है। जिससे ब्रिटिश शासनकाल में बनी सड़कों का ही इस्तेमाल हो रहा है। कहा कि लालढांग-चिल्लरखाल मार्ग का निर्माण न होने से कोटद्वार भाबर के लोगों को यूपी के रास्ते राजधानी देहरादून व हरिद्वार आवाजाही करनी पड़ रही है।