कोटद्वार। कोटद्वार की डबराल काॅलोनी निवासी प्रीति कंडवाल उस समय मात्र पांच माह की थी जब उनके पिता सुशील कंडवाल आपरेशन मेघदूत के दौरान देश रक्षा में बलिदान हो गए थे। जन्म के समय पिता ने उसे गोद में उठाया था और उसे डाॅक्टर बनाने की बात कही थी। आज प्रीति ने बलिदानी पिता के उस सपने को साकार करके दिखाया है। प्रीति का चयन उत्तराखंड में चिकित्साधिकारी (मेडिकल आफिसर) के पद पर हुआ है।
देहरादून में जब मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री ने उन्हें नियुक्ति पत्र सौंपा तो यह परिवार के लिए अत्यंत भावुक पल था। माता मीनाक्षी बताती हैं कि उनकी दो बेटियां है बड़ी बेटी दीप्ति इंजीनियर है। वर्ष 1996 में जब उन्हें पति के देश के लिए बलिदान होने की सूचना मिली तो उस समय उनकी बड़ी बेटी दो साल और छोटी बेटी मात्र पांच माह की थी।
कोटद्वार से 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद उन्होंने आर्मी काॅलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज नई दिल्ली से एमबीबीएस की पढ़ाई की। इसके उपरांत उन्होंने वर्धमान महावीर मेडिकल काॅलेज और सफदरजंग अस्पताल से एमडी की पढ़ाई की। वर्तमान में वह जनकपुरी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल नई दिल्ली में सीनियर रेजिडेंट पैथोलाजिस्ट के तौर पर कार्य कर रही थी। संवाद