दुगड्डा (कोटद्वार)। लैंसडौन वन प्रभाग की दुगड्डा रेंज की टीम ने आरक्षित वन क्षेत्र से सटे ग्रामीण इलाकों एवं वन क्षेत्र में सघन गश्त की। टीम ने ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंपर्क कर उन्हें मानव-वन्यजीव संघर्ष के संबंध में जागरूक किया।
दुगड्डा रेंज का नौड़ी वन क्षेत्र केटीआर की प्लेन रेंज की सीमा से सटा हुआ है। कुछ क्षेत्र कोटरी वन क्षेत्र की सीमा से लगा है। टीम ने वीरान वन क्षेत्र एवं वन सीमा के निकटवर्ती गांवों के ग्रामीणों से संपर्क किया। गश्ती दल के द्वारा ग्रामीणों को लिविंग विद लैपर्ड के संबंध में भी अवगत कराया गया। साथ ही वनों की सुरक्षा के लिए सहयोग करने की भी अपील की। ग्रामीण रिहायशी क्षेत्र के आसपास वनों से मवेशियों के बीच घास, चारापत्ती, ईंधन आदि लाते हैं।
गश्ती दल ने बताया कि ग्रामीणों का दायित्व है कि वे वन्यजीव जंतुओं एवं वनों के प्रति दया भाव एवं सकारात्मक भाव बनाएं। तीन दिवसीय लंबी दूरी की गश्त में वन क्षेत्र, बांसी, गजवाड़ आदि गांवों का भ्रमण कर टीम ने नौड़ी में रात्रि विश्राम किया। गश्ती दल ने नौड़ी से ढिमकी तक वन क्षेत्र का निरीक्षण कर ढिमकी में रात्रि विश्राम किया। वन क्षेत्र में पड़ने वाले नदी, नाले, गाड-गदेरों का भी टीम ने निरीक्षण किया और रात में ढिमकी चौकी में विश्राम किया।
सघन गश्त अभियान के तीसरे व अंतिम दिन ढिमकी से प्रस्थान कर दौलपुर होते हुए आमसौड़ में भ्रमण कर लंबी दूरी की गश्त का समापन किया गया। सशस्त्र गश्ती दल में टीम लीडर वन दारोगा विजय कुमार, वन आरक्षी मनोज रावत, सुजय कुशवाहा, पंकज बिष्ट, सैयद अली समेत वन श्रमिक शामिल रहे।