सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बीरोंखाल में कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों ने अस्पताल प्रबंधन पर दो माह से वेतन नहीं देने का आरोप लगाते हुए अस्पताल की ओपीडी सेवाएं ठप कर दी हैं। तीन दिन से कर्मचारी कार्य बहिष्कार पर हैं। वे अस्पताल से बाहर अस्पताल प्रबंधन का विरोध जता रहे हैं, जिसके कारण क्षेत्र की 97 ग्रामपंचायतों के लोग उपचार के लिए भटक रहे हैं।
गत 25 फरवरी को सरकार ने बीरोंखाल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत पीपीपी मोड में संचालित करने के लिए एक कंपनी के सुपुर्द कर दिया है। अस्पताल में तैनात नौ डॉक्टर समेत 53 कर्मचारियों ने करीब चार महीने तक लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दीं, लेकिन गत तीन दिनों से अस्पताल की ओपीडी सेवाएं ठप पड़ी हैं, जिससे सामान्य मरीजों को उपचार के लिए दूर दराज के अन्य अस्पतालों में भटकना पड़ रहा है। वर्तमान में मात्र अस्पताल की इमरजेंसी सेवाओं का संचालन जारी है। अस्पताल के स्वास्थ्य कर्मी आशीष, रजनीश, विक्रम सिंह, सुंदर सिंह, किशोर ने बताया कि उन्हें गत दो माह से वेतन नहीं दिया गया है, जिसके कारण आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है। अस्पताल प्रबंधन उनकी समस्या का समाधान नहीं कर रहा है, जिसके कारण सभी स्वास्थ्य कर्मियों ने ओपीडी की हड़ताल शुरू कर दी है।
सीएमओ को दी जानकारी
बीरोंखाल ब्लाक के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. शैलेंद्र रावत ने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बीरोंखाल में पीपीपी मोड पर कार्यरत कर्मचारियों और मैनेजमेंट के बीच वेतन भुगतान को लेकर हो रहे विवाद के चलते कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं। इसकी जानकारी सीएमओ पौड़ी को दे दी गई है।
वेतन नहीं देने के आरोप गलत
अस्पताल संचालित करने वाली संस्था शिवम सर्वम मेडिकल प्रोजेक्ट लिमिटेड के डायरेक्टर दीपक गोयल ने वेतन नहीं देने के आरोपों को गलत बताया। कहा कि कुछ स्थानीय कर्मचारी अन्य स्टाफ को भ्रमित कर रहे हैं, जिसके तहत हड़ताल की जा रही है। हड़ताल समाप्त कर शीघ्र अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को शुरू किया जाएगा।