वन विभाग की कार्यप्रणाली लैंसडौन वन प्रभाग के वन्यजीव और वन संपदा के लिए खतरा बनी हुई है। लैंसडौन वन प्रभाग में अधिकारियों की कमी के कारण एक रेंज अधिकारी को तीन रेंजों का प्रभार दिया गया है। जंगल की सुरक्षा भगवान भरोसे है।
अधिकारी के रेंज कार्यालय में नहीं बैठने के कारण वन से संबंधित मामलों को लेकर आने वाले लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है। साथ ही जंगल की सुरक्षा भी भगवान भरोसे है।
वर्तमान में कोटद्वार रेंज में तैनात रेंज अधिकारी अजय ध्यानी के पास कोटद्वार रेंज के अलावा लालढांग और लैंसडौन रेंज का भी प्रभार दिया गया है। इस कारण वो तीनों रेंज में पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं। उनका अधिकतर समय तीनों रेंजों की विभागीय बैठक और कागजी कार्रवाई में बीत जाता है। रेंज कार्यालय में अपनी समस्याएं लेकर आने वाले लोगों को रेंज अधिकारी के दर्शन नहीं हो रहे हैं। इसके कारण उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है। वहीं यूपी से सटे कोटद्वार और लालढांग रेंज के वन्यजीव और वन संपदा की सुरक्षा को लेकर वे पूरा समय नहीं दे पा रहे हैं।
मेरे पास कोटद्वार, लालढांग और लैंसडौन रेंज का प्रभार है। सप्ताह के शनिवार को लैंसडौन, शुक्रवार और रविवार को लालढांग और शेष दिन कोटद्वार रेंज का कार्य देखते हैं। जंगल की व्यवस्थाओं को बनाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। - अजय ध्यानी, रेंज अधिकारी लैंसडौन वन प्रभाग