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कोई गांव सड़क से वंचित तो कहीं पानी नहीं

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सतपुली। पोखड़ा ब्लॉक मुख्यालय से 28 किमी दूरी पर स्थित और 32 उपगांवों और 727.25 हेक्टेयर में फैली गडरी ग्रामसभा अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण अनेक समस्याओं से जूझ रही है। ग्रामसभा के भ्रमण में ही ग्राम प्रधान को एक सप्ताह का समय लग जाता है। ऐसे में समस्याओं का निराकरण निर्धारित अवधि में करना बेहद चुनौतीपूर्ण है। हालात यह हैं कि ग्रामसभा के 32 में से 15 गांव मोटर मार्ग से वंचित हैं। करीब दर्जनभर गांव पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। ऐसे में ग्रामसभा में विद्युत, पेयजल व संपर्क मार्ग समेत अन्य विकास कार्य करवाना टेढ़ी खीर साबित होता है।
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क्या हैं कारण
ग्रामीणों द्वारा लंबे समय से ग्रामसभा को 5-6 ग्रामसभाओं में बांटने की मांग की जा रही है, लेकिन ग्रामसभा में गडरी के अलावा कोई अन्य राजस्व ग्राम न होने के कारण ग्रामसभा का विभाजन संभव नहीं है।
ग्रामसभा के अंतर्गत गांव
ग्रामसभा गडरी के अंतर्गत गडरी मल्ली, गडरी तल्ली, नागत, नौली, तिमलपट, देगला मल्ला, देगला तल्ला, ड्वीलाखाल, काफलखांद, ड्वीला मल्ला, धकनीधार, छोरधार मल्ला, छोरधार तल्ला, दमदेवल, पटल्यूंधार, घिंघरखेत, भगल्वाण, छोयाधार मल्ला, छोयाधार तल्ला, तैराण, तपड़धार, मोढुंग, संदणा, दोलधार, पोखरधार, खचरियूंधार मल्ला, खचरियूंधार तल्ला, तांयूधार, खराल, ताली, खंदोरी, खंदोरी पल्ला गांव शामिल हैं।
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ग्राम सभा के समुचित विकास के लिए विभाजन आवश्यक है, लेकिन पंचायती राज विभाग द्वारा राजस्व ग्राम न होने का हवाला देकर मामले को टाला जा रहा है। अगले चुनाव से पूर्व जनहित में ग्रामसभा का विभाजन किया जाना चाहिए।
-प्रीति बाला नेगी ग्राम प्रधान।
राजस्व ग्राम का गठन राजस्व परिषद द्वारा जिलाधिकारी की संस्तुति पर किया जाता है। जब गडरी ग्रामसभा के उपगांवों को राजस्व ग्राम बनाया जाएगा, तभी ग्रामसभा का परिसीमन एवं विभाजन संभव हो पाएगा।
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-एमएम खान, डीपीआरओ।
-फोटो
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