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हर साल मालन की बाढ़ की भेंट चढ़ रही किसानों की उपजाऊ जमीन

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किशनपुर (कोटद्वार)। भाबर के काश्तकारों के लिए मालन नदी बड़ी मुसीबत बन गई है। हर साल बरसात में किसानों की कई बीघा उपजाऊ जमीन लील चुकी मालन नदी से इस बार भी भूकटाव का खतरा मंडरा रहा है। मालन नदी से सटे पदमपुर मोटाढांक, देवरामपुर, नंदपुर, गोरखपुर, कोटला व मवाकोट क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से बरसात के दौरान मालन के उफान में काश्तकारों की भूमि भेंट चढ़ रही है। बाढ़ सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं होने से स्थानीय लोगों और काश्तकारों में आक्रोश है।
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स्थानीय काश्तकार खेम सिंह नेगी, शंभू प्रसाद डोबरियाल, बचन सिंह, प्रताप सिंह, राधेश्याम डोबरियाल, जगदीश सिंह, महावीर सिंह, अर्जुन सिंह, नरेंद्र सिंह बिष्ट, जगदीश बहुखंडी, भगत सिंह नेगी, रोशनलाल कुकरेती, देवीप्रसाद जोशी व मदनमोहन जोशी का कहना है कि मालन नदी से हर साल खेती की जमीन कट कर बह रही है। पिछले वर्षों से काश्तकारों की कई बीघा भूमि बरसात के दिनों में मालन के उफान की भेंट चढ़ चुकी है। मालन नदी का रुख पूरी तरह से कोटला, मवाकोट क्षेत्र की ओर हो गया है। पिछले वर्ष शासन-प्रशासन की ओर से खानापूर्ति के लिए सुरक्षा के लिए चेकडैम बनाए गए, जिनकी ऊंचाई नाम मात्र की है। वर्तमान में मालन नदी में आए मलबे के कारण चेकडैम और नदी का स्तर बराबर हो गया है। इसके कारण बरसात में चेकडैम कृषि भूमि की सुरक्षा करने में पूरी तरह से असक्षम है। स्थानीय लोगों ने शासन-प्रशासन से नदी के रुख को डायवर्ट करने और चेकडैम की ऊंचाई बढ़ाने की मांग की है। कहा कि कण्वाश्रम से पदमपुर मोटाढांक मोटर पुल तक सुरक्षा दीवार और चेकडैम बनाने की जरूरत है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता सुबोध मैठाणी का कहना है कि जरूरत और प्राथमिकता के आधार पर प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजे जा रहे हैं।
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