उत्तराखंड के 7509 ग्राम पंचायतों में आज भी कई परिवारों के पास शौचालय नहीं है। शौचालय न होने से खुले में शौच करना इन परिवारों की मजबूरी बना हुआ है। गांवों को खुले में शौच से मुक्त करने के मामले में स्वच्छ भारत मिशन की बेस लाइन सर्वे की रिपोर्ट संचालित कार्यक्रमों की पोल खोल रही है।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में प्रत्येक परिवार को शौचालय सुविधा से जोड़ने के लिए पिछले एक दशक से अभियान चल रहा है। इसके अंतर्गत शौचालय निर्माण के लिए प्रोत्साहन राशि देकर ग्रामीणों को शौचालय बनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। वर्ष 2004 में इसकी शुरुआत ‘संपूर्ण स्वच्छता कार्यक्रम’ से की गई। तब ग्रामीणों को शौचालय निर्माण के लिए पांच सौ रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाती थी। कुछ समय बाद इसे निर्मल भारत अभियान के नाम से संचालित किया गया। वर्ष 2012 से यह अभियान स्वच्छ भारत मिशन के नाम से चल रहा है। वर्तमान में इस अभियान के अंतर्गत लोगों को शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार रुपये की राशि दी जा रही है।
प्रदेश में इस कार्यक्रम को शुरू हुए करीब 12 साल पूरे होने को हैं। इन 12 सालों में प्रदेश में यह कार्यक्रम कोई खास रंग नहीं दिखा पाया है। भारत स्वच्छ अभियान के अंतर्गत स्वजल विभाग की ओर से भारत सरकार को भेजे जाने वाली इस बेस लाइन सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार इस साल जनवरी महीने के अंत तक प्रदेश में मात्र 463 ग्राम पंचायतें ही ऐसी है जिनमें सभी परिवारों पास शौचालय है। 7509 ग्राम पंचायतों में अभी भी ऐसे परिवार हैं जिनमें कई परिवारों के पास अभी भी शौचालय नहीं हैं। इन परिवारों को शौच के लिए अभी खुले स्थान पर जाना पड़ रहा है।
पौड़ी जिला आगे, चंपावत फिसड्डी
पौड़ी। ग्राम पंचायतों में सभी परिवारों को शौचालय से जोड़ने के मामले में प्रदेश में पौड़ी जिला सबसे आगे है। पौड़ी जिले में सर्वाधिक 111 ग्राम पंचायतों में सभी परिवारों के पास शौचालय हैं। जबकि चंपावत जिले में अभी एक ही ग्राम पंचायत ऐसी है जिसमें सभी परिवार शौचालय सुविधा से जुड़े हैं। पूरी तरह शौचालय सुविधा से आच्छादित अन्य ग्राम पंचायतों में 69 ग्राम पंचायतें चमोली की, 15 देहरादून की, 12 हरिद्वार की, 37 रुद्रप्रयाग की, 19 टिहरी की, 32 उत्तरकाशी की, तीन अल्मोड़ा की, सात बागेश्वर की, 101 पिथौरागढ़ की, तीन नैनीताल की और 26 ऊधमसिंह नगर की हैं।
अल्मोड़ा में 1164 ग्राम पंचायतों के
कई परिवारों के पास नहीं शौचालय
पौड़ी। प्रदेश में जिन 7509 ग्राम पंचायतों कई परिवारों के पास शौचालय नहीं है उनमें सर्वाधिक 1164 ग्राम पंचायतें अल्मोड़ा जिले की है। इसके अलावा चमोली में 544, देहरादून में 445, हरिद्वार में 304, पौड़ी में 1103, रुद्रप्रयाग में 301, टिहरी में 1011, उत्तरकाशी में 472, बागेश्वर में 409, चंपावत में 312, नैनीताल में 494, पिथौरागढ़ में 586 और ऊधमसिंह नगर में 364 ग्राम पंचायतों कई परिवार शौचालय सुविधा से वंचित है।
प्रोत्साहन राशि कम होना, जागरूकता की कमी
पौड़ी। ग्रामीण क्षेत्रों में सभी परिवारों के पास शौचालय न होने का मुख्य कारण लोगों जागरूकता की कमी एवं योजना के अंतर्गत शौचालय बनाने के लिए दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि का कम होना है। ग्रामीणों का कहना है कि इसके अंतर्गत अब शौचालय बनने के बाद प्रोत्साहन राशि दी जाती है। जो काफी कम होती है। कई लोग जागरूकता की कमी से इसका लाभ नहीं उठा पाते हैं।
कोट
प्रदेश में पौड़ी जिले में सबसे अधिक 111 ग्राम पंचायतों में ऐसी है जिनमें सभी परिवारों के पास शौचालय है। इनमें सर्वाधिक 14 ग्राम पंचायतें जयहरीखाल में हैं। अन्य ग्राम पंचायतों में भी सभी परिवारों में शौचालय के लिए कवायदें चल रही है। इन गांवों की रिपोर्ट रोज भारत सरकार को भेजी जाती है। इसकी समीक्षा भी की जाती है।
- सोमनाथ सैनी, परियोजना प्रबंधक स्वजल पौड़ी गढ़वाल