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नौ साल में भी नहीं बना आईटीआई भवन

Tue, 06 Dec 2016 10:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला काोटद्वार
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कोटद्वार। शासन-प्रशासन रोजगारपरक शिक्षा की बात तो करता है, लेकिन उस पर खुद कितना अमल कर रहा है, इसका उदाहरण रिखणीखाल ब्लॉक के एक मात्र औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्र (आईटीआई) है। नौ साल से निर्माणाधीन इस आईटीआई के भवन का निर्माण अब तक पूरा नहीं हो सका है। भवन का निर्माण पूरा न होने से यहां नए तकनीकी ट्रेड भी नहीं खुल पा रहे हैं। इसके चलते यहां के युवाओं को व्यावसायिक शिक्षा के लिए कोटद्वार, श्रीनगर या फिर देहरादून की दौड़ लगानी पड़ रही है।
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लैंसडौन विधानसभा के रिखणीखाल ब्लाक मुख्यालय में राजकीय औद्यौगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) वर्ष 2006 में स्वीकृत हुआ था। वर्ष 2007 में सरकार ने आईटीआई के भवन निर्माण के लिए करीब 115.57 लाख रुपये का बजट स्वीकृत कराया था। कार्यदायी संस्था पेयजल निर्माण निगम श्रीनगर को बनाया गया। बताया जा रहा है कि शासन से निर्माण एजेंसी को करीब 80 लाख रुपये अवमुक्त हुए थे। इसके बाद पैसा नहीं आने पर भवन का काम अधूरा पड़ गया। हालांकि बाद में फिर एजेंसी को पूरा पैसा रिलीज हो गया, लेकिन कार्यदायी संस्था का बजट बढ़कर करीब 190.00 लाख हो गया। यह धनराशि अब तक कार्यदायी संस्था को नहीं मिल सकी है। स्थिति यह है कि नौ साल बीत जाने के बाद भी भवन का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है। इससे उक्त आईटीआई राजकीय इंटर कॉलेज रिखणीखाल के एक कक्ष में संचालित हो रहा है। अपना भवन न होने के कारण संस्थान में ट्रेड भी नहीं बढ़ पा रहे हैं। इससे छात्रों को संस्थान का लाभ नहीं मिल पा रहा है।    

क्या कहते हैं खंड शिक्षा अधिकारी
बीईओ रिखणीखाल रामफल पाल का कहना है कि क्षेत्र में 11 इंटर कॉलेज और 12 हाईस्कूल हैं, लेकिन आसपास एक भी बेहतर तकनीकी शिक्षा केंद्र न होने के कारण छात्रों को कोटद्वार, श्रीनगर और देहरादून के शिक्षा केंद्रों की शरण लेनी पड़ती है।      
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कार्यदायी संस्था को सारा बजट रिलीज हो गया है, लेकिन कार्य में देरी के कारण संस्था ने करीब 190.00 लाख के बजट का प्रस्ताव भेजा है। जो उन्हें नहीं मिल पाया है। भवन तीन मंजिला बनना है, जिसमें दो मंजिलों का कार्य करीब पूरा हो गया है। तीसरी मंजिल का कार्य चल रहा है। भवन में बिजली और पानी की व्यवस्था न होने के कारण केंद्र को शिफ्ट नहीं किया जा रहा है। अगर भवन बनकर तैयार हो जाता है तो केंद्र को शिफ्ट कर दिया जाएगा और नए ट्रेड भी संचालित किए जाएंगे।      
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-संजीव कुमार, प्रधानाचार्य आईटीआई रिखणीखाल/श्रीनगर
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