ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस) की लापरवाहीपूर्ण कार्यप्रणाली के कारण तीन माह पहले हैंडओवर हुआ राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय देवीधार हर्षू का भवन बदहाल हो गया है। आलम यह है कि नवनिर्मित विद्यालय भवन की छत से पानी टपक रहा है, दीवारों पर काई लगी हुई है, भवन की सुरक्षा दीवार में दरार पड़ी हुई है, सीढ़ी की सुरक्षा दीवार टूट गई है।
विद्यालय का भवन अति जर्जर होने के कारण वर्ष 2010-11 में शासन द्वारा नए भवन निर्माण की स्वीकृति दी गई थी। इसके लिए आरईएस को 43.8 लाख का बजट दिया गया था, लेकिन विभाग द्वारा भवन निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया। गत अप्रैल को विद्यालय भवन को शिक्षा विभाग के हैंडओवर किया गया था, लेकिन तीन माह के अंदर ही विद्यालय की हालत बदहाल होने लगी है।
पूर्व प्रधान चंद्रमोहन गौड़, चंडी प्रसाद कुकरेती, ललिता प्रसाद कुकरेती, रमेश चंद्र गौड़, चंद्रमोहन नेगी व शशिकांत गौड़ ने आरईएस पर भवन निर्माण में अनियमितता बरतने का आरोप लगाया। कहा कि भवन निर्माण में विभाग द्वारा गुणवत्ता की कमी के चलते भवन गिरने के कगार पर है। दो मंजिला चढ़ने के लिए सीढ़ी पर बनी सुरक्षा दीवार गिर गई है। छत से टपकते पानी के कारण भवन कमजोर हो गया है। भवन की मरम्मत कराने के आश्वासन के बाद भी विभाग भवन की मरम्मत नहीं कर रहा है। उन्होंने प्रशासन से भवन निर्माण की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की।
उधर, आरईएस के सहायक अभियंता योगेंद्र कुमार का कहना है, कि भवन निर्माण में ठेकेदार द्वारा लापरवाही बरती गई है। निर्माण कार्य में जो खामियां पाई गई हैं, वे ठेकेदार से पूरी कराई जाएंगी। भवन की मरम्मत का कार्य पूरा नहीं होने पर उसका भुगतान रोक दिया जाएगा।
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