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लापरवाही: बोल्डर हटाया नहीं, नाले को ही मोड़ दिया

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कोटद्वार। इसे काम में तेजी लाना कहें या फिर काम निपटाने का प्रयास। रेलवे कंस्ट्रक्शन कंपनी की ओर से बनाए जा रहे निकासी नाले की राह में पड़े तीन बड़े पत्थरों को हटाने की जगह नाले को ही मोड़ दिया गया। इससे करीब पांच फीट का यू-टर्न आ गया है। लोगों का कहना है कि इससे नाले के प्रवाह में बाधा पहुंचेगी। ये हालात तब है, जब कोटद्वार रेलवे स्टेशन को करोड़ों रुपये के बजट से अमृत भारत स्टेशन के रूप में विकसित किया जा रहा है।

कोटद्वार रेलवे स्टेशन से नई दिल्ली के लिए सिद्धबली जनशताब्दी एक्सप्रेस और आनंद विहार के लिए एक्सप्रेस ट्रेन संचालित होती है। जबकि नजीबाबाद के लिए तीन पैसेंजर ट्रेनें भी चलती हैं। पौड़ी गढ़वाल का बड़ा क्षेत्र रेल सेवाओं से लाभान्वित होता है। इसके मद्देनजर सीमांत स्टेशन को रेलवे ने अमृत भारत स्टेशन के रूप में विकसित करना शुरू किया है। स्टेशन के भूतल भवन का निर्माण धीमी गति से चल रहा है। अभी तो लेंटर तक भी भवन नहीं पहुंच सका है, जबकि डीआरएम तीन बार दौरा कर काम में तेजी और गुणवत्ता लाने के निर्देश दे चुके हैं। काम में जुटे इंजीनियर्स न तो काम में तेजी ला पा रहे और न ही गुणवत्तापरक कार्य में खरे उतर पा रहे हैं।
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रेलवे प्लेटफाॅर्म किनारे बनाए जा रहे नाले के बीच तीन पत्थर (बोल्डर) आ जाने पर कार्यदायी एजेंसी ने इन पत्थरों को हटवाने के बजाए नाले में करीब पांच फीट का यू-टर्न दे दिया। कंपनी के इंजीनियर पुनीत कुमार ने बताया कि पत्थर बड़े होने के कारण उन्हें नहीं हटाया गया। लेकिन इन पत्थरों को तोड़कर अथवा किसी और माध्यम से हटाने की बात को वह टाल गए। वहीं, इससे 10 कदम के फासले पर ही नाले के रास्ते में दीवार आने पर नाले को फिर से एल-टाइप में बनाने की तैयारी कर ली गई है।
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निकासी नाला भूमिगत बन रहा है। इसमें केवल प्लेटफाॅर्म के पानी की ही निकासी होगी। फिर भी नाले को सीधा बनाने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाना चाहिए था। इस मामले को दिखवाया जाएगा।



-सुबोध चौहान, सीनियर सेक्शन इंजीनियर एवं प्रभारी गति शक्ति यूनिट, मुरादाबाद
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