कोटद्वार। कार्बेट नेशनल पार्क से सटे लैंसडौन वन प्रभाग के आरक्षित वन क्षेत्र में नए साल का जश्न मनाने के दौरान वन कानूनों की अनदेखी करना थापर-नंदा समेत उनके साथ आए सोलह लोगों पर भारी पड़ गया है। कोर्ट के आदेश पर कोटद्वार पुलिस सोमवार को उन्हें जीएमओयू की साधारण बस में बिठाकर पौड़ी जेल ले गई। उधर, थापर-नंदा जैसे लोगों की गिरफ्तारी की सूचना मिलते ही दिल्ली से कई नामी वकील कोटद्वार पहुंच गए हैं। सोमवार को बचाव पक्ष की ओर से एसीजेएम भवदीप रावते की अदालत में एक प्रार्थनापत्र लगाया गया था, लेकिन अदालत ने सुनवाई के लिए मंगलवार की तिथि निर्धारित कर दी है। मंगलवार को कोर्ट में उनकी जमानत पर बहस होगी। आरक्षित वन क्षेत्र में वन कानूनों के उल्लंघन समेत कई धाराओं में दर्ज इस मुकदमे की जांच कालागढ़ के इंस्पेक्टर को सौंप दी गई है। विवेचना अधिकारी ने सोमवार को कोटद्वार पुलिस टीम के साथ घटनास्थल का मौका मुआयना कर साक्ष्य एकत्र करते हुए विवेचना शुरू कर दी है। पुलिस के सर्च आपरेशन के बाद दर्ज मुकदमे से वन विभाग में हड़कंप मचा है।
वन अधिनियम, शस्त्र अधिनियम और आबकारी अधिनियम के तहत कानूनों की अनदेखी और उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार समीर थापा और जयंत नंदा समेत सोलह लोगों को कोर्ट के आदेश पर कोटद्वार पुलिस सोमवार को पौड़ी जेल ले गई है। रविवार की रात न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट से 30 आर्म्स एक्ट और आबकारी अधिनियम के तहत तो उन्हें जमानत मिल गई लेकिन वन अधिनियम के मामले जमानत प्रार्थनापत्र खारिज होने से उन्हें चौदह दिन की न्यायिक अभिरक्षा में पौड़ी जेल भेज दिया गया। देर रात होने के कारण समीर थापा और नंदा समेत सभी रईसजादों को रविवार की रात कोटद्वार कोतवाली में पुलिस अभिरक्षा में बितानी पड़ी। उनकी संख्या को देखते हुए पुलिस ने उन्हें थाने में ही एक अलग कमरे में रखा। सीओ जेआर जोशी ने बताया कि सोमवार तड़के जीएमओयू की साधारण बस से उन्हें पौड़ी जेल भेज दिया गया है। बस में उपनिरीक्षक सतेंद्र भाटी की अगुवाई में पुलिस की टीम भी सुरक्षा कारणों से उनके साथ भेजी गई थी।
सोमवार को इन लोगों की जमानत के लिए बचाव पक्ष की ओर से एक बार फिर से प्रयास शुरू हुए। दिल्ली से आए करीब आठ दस नामी गिरामी वकील सुबह दस बजे ही कोटद्वार के सिमलचौड़ स्थित न्यायालय परिसर पहुंच गए थे, जिससे न्यायालय परिसर में खासी गहमागहमी रही। पुलिस की ओर से अभियोजन अधिकारी अधिवक्ता आशुतोष कंडवाल ने बताया कि बचाव पक्ष की ओर से कोर्ट में आर्म्स एक्ट के तहत अरजेंट सुनवाई का प्रार्थनापत्र दाखिल किया गया था, जिस पर कोर्ट ने बहस के लिए तीन जनवरी की तिथि नियत कर दी है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुख्तार मोहसिन ने बताया कि आरक्षित क्षेत्र में जश्न मनाने के दौरान वन कानूनों की अनदेखी के इस मामले की जांच कालागढ़ के पुलिस इंस्पेक्टर प्रीतम सिंह को सौंपी गई है। कोटद्वार के कोतवाल उत्तम सिंह जिमिवाल की ओर से दर्ज इस मुकदमे की जांच दूसरे थाने के इंस्पेक्टर को सौंपनी पड़ी है। पौड़ी पुलिस की एक टीम ने विवेचना अधिकारी के साथ कोल्हूचौड वन विश्राम गृह पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य एकत्र किए।
पौड़ी। जेलर डीपी सिन्हा ने बताया कि अदालत के आदेशानुसार सभी आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में जिला कारागार में निरुद्ध किया गया है।