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10 मीटर चौड़ा होगा बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग

Sun, 01 Jan 2017 10:20 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला काोटद्वार
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श्रीनगर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों ऑल वेदर रोड का शिलान्यास होने के बाद अब राष्ट्रीय राजमार्गों के चौड़े होने का इंतजार है। ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण की भी योजना इसी परियोजना में शामिल है। वर्तमान में मुनि के रेती से स्वीत तक 103 किलोमीटर पैच के चौड़ीकरण कार्य की कागजी कार्रवाई अंतिम चरण में हैं। इन दिनों वन भूमि हस्तांतरण के प्रस्ताव बनाकर नोडल आफिस भेजने की तैयारी चल रही है। वहीं निजी नापभूमि में मुआवजा संबंधी कार्रवाई चल रही है।
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मालूम हो कि बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग का पिछले डेढ़ दशक से डबललेन में उच्चीकरण चल रहा है। कई स्थानों में सड़क डबललेन में उच्चीकृत हो भी चुकी है। अभी यह सड़क 5 से 7 मीटर चौड़ी है, लेकिन अब पूरी सड़क को 10 मीटर चौड़ा किया जाएगा। यह थ्री लेन के समान होगी, जिस कारण इसे टू लेनिंग विद पेव्ड शोल्डर (पक्के आधार के साथ डबल लेन सड़क) का नाम दिया गया है। सड़क में जहां स्थान मिलेगा, वहां जन सुविधाओं का विकास होगा और वाहन पार्किंग के लिए जगह बनाई जाएगी। इस राजमार्ग का मुनि की रेती से स्वीत पुल तक (किलोमीटर 235-338) तक चौड़ीकरण लोनिवि राष्ट्रीय राजमार्ग श्रीनगर खंड की निगरानी में होगा। सड़क का चौड़ीकरण ईपीसी (इंजीनियरिंग प्रोक्योरमेंट कंस्ट्रक्शन) मोड़ में किया जा रहा है। यानि कि निर्माण से लेकर देखरेख का जिम्मा ठेकेदार का ही होगा।
लोनिवि राष्ट्रीय राजमार्ग खंड के अधिशासी अभियंता जितेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि तीन पैकेज (मुनि की रेती-कौडिय़ाला, कौड़ियाला-देवप्रयाग, देवप्रयाग-स्वीत) में सड़क चौड़ीकरण की मंजूरी मिली है। बताया कि सारी कार्रवाई एक साथ चल रही है। देवप्रयाग-स्वीत तक के पैच का अनुबंध होना शेष है। जबकि मुनि की रेती-कौड़ियाला व कौडिय़ाला-देवप्रयाग पैच की टेक्नीकिल बिड के बाद मूल्यांकन चल रहा है। वन भूमि हस्तांतरण की पत्रावलियां इसी हफ्ते नोडल आफिस भेजी जाएंगी। वही निजी नापभूमि के अधिग्रहण के लिए आपत्तियां मांगी गई थी। जो निस्तारण के लिए भेज दी गई हैं।
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560 मीटर लंबे वाया डक्ट का निर्माण
श्रीनगर। राष्ट्रीय राजमार्ग पर जयालगढ़ और व्यासी के निकट दो बड़े पुल बनेंगे। जबकि मरीन ड्राइव में सड़क का तल उठाने के लिए 560 मीटर वाया डक्ट (पुल) का निर्माण होगा। जो नदी के किनारे-किनारे बनाया जाएगा। यहां बरसात में गंगा का जल स्तर बढ़ने से पानी राजमार्ग तक पहुंच जाता है। वाया डक्ट निर्माण से यह समस्या दूर होगी।
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