नैनीडांडा ब्लाक के अंतर्गत काली नदी में बनी हल्दूखाल-नैनीडांडा पंपिंग योजना का पंप हाउस।
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नैनीडांडा ब्लाक के अंतर्गत नैनीडांडा-हल्दूखाल पंपिंग पेयजल योजना निर्माण के डेढ़ साल बाद ही दम तोड़ने लगी है। योजना के तहत शामिल हल्दूखाल बाजार समेत कई अन्य गांवों में गत कई दिनों से पेयजल संकट बना हुआ है, जिससे ग्रामीणों में जल संस्थान के खिलाफ रोष व्याप्त है। स्थिति यह है कि लोग कई किमी. दूर स्थित प्राकृतिक स्रोतों से पानी ढोकर अपने हलक तर कर रहे हैं।
वर्ष 2006 में नैनीडांडा ब्लाक के 40 गांवों में पेयजल संकट को देखते हुए सरकार ने काली नदी में नैनीडांडा पंपिंग पेयजल योजना के निर्माण को स्वीकृति प्रदान की। जल निगम को कार्यदायी संस्था बनाया गया। बारह साल के इंतजार के बाद करीब 18.37 करोड़ की लागत से बनी इस योजना का 12 जून, 2019 को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने लोकार्पण किया। योजना के निर्माण के बाद ग्रामीणों को उम्मीद थी कि उन्हें पेयजल संकट से निजात मिल जाएगी, लेकिन उम्मीदों पर पानी फिर गया। ग्राम सभा उम्टा के भैड़गांव तल्ला, उम्टा, मुंजरा बैंड, सिमली मल्ली, सुंदोली, हल्दूखाल बाजार समेत कई गांवों के ग्रामीणों को इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। क्षेत्र पंचायत सदस्य प्रभा नेगी, प्रधान संघ के अध्यक्ष देवेंद्र रावत, धर्मेंद्र नेगी, चमन सिंह, संदीप नेगी, बचन सिंह आदि ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने सीएम हेल्पलाइन में भी शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीण पेयजल के लिए भटक रहे हैं।
जल संस्थान सहायक अभियंता रमाकांत गुप्ता का कहना है कि लंबी लाइन होने के कारण कई जगह लीकेज और चोक हैं। मलबे से भी लाइन क्षतिग्रस्त हुई हैं, जिससे मिरवाड़ी स्थित पेयजल टैंक नहीं भर पा रहा है। लाइनों को ठीककर पेयजल की आपूर्ति सुचारु करने के प्रयास किए जा रहे हैं।