पहले ही मेडिकल अफसरों की कमी से जूझ रहे बेस अस्पताल प्रशासन की मुश्किलें अब और भी बढ़ गईं। यहां संविदा पर कार्यरत एक मेडिकल अफसर ने नौकरी छोड़ दी है। इसका खामियाजा अस्पताल में आने वाले मरीजों को भुगतना पड़ेगा।
दरअसल विशेषज्ञ चिकित्सकों को इमरजेंसी वार्ड में लगाने से ओपीडी प्रभावित हो रही है। वहीं, बेस अस्पताल में विशेषज्ञों की भारी कमी के बावजूद प्रदेश में 18 चिकित्सकों के संविदा विस्तार के दौरान किसी भी चिकित्सक को बेस अस्पताल कोटद्वार से संबद्ध नहीं किया गया। चिकित्सकों की कमी के चलते अस्पताल में आने वाले मरीजों को तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
राजकीय बेस अस्पताल में चार महीने पहले डॉ. आकांक्षा कुकरेती ने संविदा पर मेडिकल अफसर का दायित्व संभाला था। इसके बाद अस्पताल की व्यवस्थाएं कुछ ठीक हुईं थीं। अब हाल ही में डॉ. आकांक्षा ने इस्तीफा दे दिया। ऐसे में अब अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में केवल तीन मेडिकल अफसर ही बचे हैं। उनमें भी डॉ. कोमल अवकाश पर हैं। वार्ड का दायित्व डॉ. इमरान और डॉ. राशिद के कंधों पर ही है। इधर, डॉ. इमरान काे भी पीजी के लिए जाना है। ऐसे में जल्द अस्पताल में मेडिकल अफसरों की तैनाती नहीं हुई तो व्यवस्थाएं और बिगड़ जाएंगी।
बुधवार को इमरजेंसी वार्ड में सुबह की शिफ्ट में नेत्र सर्जन डॉ. डीके सिंह और दोपहर की शिफ्ट में ईएनटी सर्जन डॉ. मोहित कुमार लगे थे। बृहस्पतिवार को सुबह की शिफ्ट में डॉ. कुसुमा रावत ने इमरजेंसी वार्ड की व्यवस्था देखी। चिकित्सकों ने इमरजेंसी वार्ड में ही संबंधित मरीजों को देखा। जबकि सीधे ओपीडी पर पहुंचने वाले कई मरीज विशेषज्ञ चिकित्सकों के नहीं मिलने पर वापस लौट गए।
मेडिकल अफसर को नहीं किया संबद्ध
स्वास्थ्य निदेशालय ने देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार, रुड़की, नैनीताल आदि क्षेत्रों में 18 चिकित्सकों का संविदा विस्तार तो किया, लेकिन इनमें से किसी चिकित्सक को मेडिकल अफसर के रूप में बेस अस्पताल से संबद्ध नहीं किया गया।
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अस्पताल में इमरजेंसी मेडिकल अफसर, विशेषज्ञ चिकित्सकों और निश्चेतक की कमी से स्वास्थ्य निदेशालय, सीएमओ एवं जनप्रतिनिधियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है।
-डॉ. राजीव पाल, पीएमएस, बेस अस्पताल कोटद्वारI