कोटद्वार। जल्द ही खोह नदी के दिन बहुरेंगे। सरकार ने नदी के संरक्षण और पुनर्जनन के साथ ही इस क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए दो योजनाएं प्रस्तावित की हैं। इसके लिए 40 करोड़ के बजट को भी मंजूरी प्रदान दी गई है। इसके साथ ही खोह नदी के तट पर सिद्धबली के पास मरीन ड्राइव के लिए अलग से 22 करोड़ भी स्वीकृत किए गए हैं।
द्वारीखाल ब्लॉक से निकलने वाली लंगूरगाड़ और जयहरीखाल ब्लॉक से निकलने वाली सिलगाड़ नदियों के दुगड्डा में संगम के बाद खोह नदी बन जाती है। बरसात के मौसम में नदी भले ही खोह नदी विकराल रूप में नजर आए, लेकिन बरसात समाप्त होते ही खोह का जलस्तर कम होने लगता है और गर्मियां आते-आते नदी का जलस्तर काफी कम हो जाता है। खोह नदी से लगे सात किमी क्षेत्र में हाथी कॉरिडोर और लैंसडौन वन प्रभाग के दुगड्डा रेंज के जंगलों में रहने वाले जीव जंतु पानी के लिए इसी नदी पर निर्भर हैं। नदी को पुनर्जीवित करने के लिए लैंसडौन वन प्रभाग ने एक बार फिर नए सिरे से कवायद शुरू कर दी है।
कोटद्वार में पर्यटन की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। इसके तहत खोह नदी के संरक्षण के लिए प्लांटेशन और झील निर्माण के लिए कैंपा और जायका योजना से 40 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। सिद्धबली मंदिर के नजदीक मरीन ड्राइव के लिए 22 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी मिल चुकी है।
-डा. हरक सिंह रावत, वन एवं पर्यावरण मंत्री उत्तराखंड सरकार।
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