राठ क्षेत्रवासियों की आराध्य देवी मां कालिंका बूंखाल के दरबार में पांच दिसंबर को शुरू हो रहे मेले को शांतिपूर्वक तरीके से और बिना पशुुबलि के संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी है। बूंखाल मेला क्षेत्र में चेक पोस्ट और बैरिकेडिंग निर्माण का कार्य भी शुरू कर दिया गया है।
राठ क्षेत्रवासियों की आराध्य देवी मां कालिंका बूंखाल के दरबार में लगने वाला मेला पहले सैकड़ों पशुओं की बलि देने के लिए चर्चित था। क्षेत्रवासियों, सामाजिक संस्थाओं और प्रशासन के सहयोग से वर्ष 2011 से इस मेले में पशु बलि बंद हो गई। मेले में बागी के स्थान पर अब क्षेत्र के गांवों से देवी देवताओं की डोलियां लाई जाती हैं।
अब पशुबलि के स्थान पर यहां नारियल चढ़ाए जाते हैं। मेले को शांतिपूर्वक तरीके से संपन्न कराना प्रशासन के लिए चुनौती बना रहता है। जिलाधिकारी चंद्र शेखर भट्ट ने बताया कि बूंखाल मंदिर क्षेत्र में बैरिकेडिंग का निर्माण, बूंखाल मेले को जाने वाले मेलसैण, चौरीखाल आदि स्थानों पर चेक पोस्ट बनाने का कार्य शुरू कर दिया गया है।
इस बार भी यह मेला बिना पशुबलि के संपन्न होगा। क्षेत्रवासियों से इसके लिए पूरा सहयोग मिल रहा है। मेले के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पटवारी और पुलिस फोर्स तैनात की जा रही है।
जल संस्थान और ऊर्जा निगम के अधिकारियों को बूंखाल मेला परिसर, चौरीखाल में बिजली और पानी की व्यवस्था सुचारु रखने के लिए निर्देशित किया गया है।
डोलियां हो रहीं तैयार
मेले में देवी देवताओं की डोलियां लाने के लिए क्षेत्र के गांवों में जोरों पर तैयारियां चल रही है। सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र नौटियाल ने बताया कि इस बार भी कंडारस्यूं, बाली कंडारस्यूं, घुड़दौड़स्यूं पट्टियों के कई गांवों से देवी देवताओं की डोलियां गाजे बाजे के साथ मंदिर में पहुंचेंगी।