लंका पर विजय पाने के लिए आतुर वानर सेना में तब अचानक शोक छा गया, जब मेघनाद की शक्ति से लक्ष्मण बेहोश हो गए। वीर हनुमान संजीवनी बूटी की खोज में पूरा पहाड़ ही उठाकर ले आए। सोमवार रात लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी भी सपरिवार रामलीला मंचन का आनंद लेने के लिए रामलीला मैदान में दर्शकों के बीच उपस्थित रहे।
पौड़ी में रामलीला सोमवार रात समुद्र विनती से शुरू हुई। भगवान राम अंगद को लंका में जाकर रावण से वार्ता करने के लिए भेजते हैं। अंगद लंका पहुंचकर रावण को समझाने का प्रयास करता है, लेकिन रावण दरबार में सभी उसे अपमानित करते हैं।
इसके बाद अंगद उन्हें ललकारते हुए अपने पांव को हिलाने की चुनौती देता है। सभी राक्षस अंगद का पांव हिलाने की कोशिश करते हैं, लेकिन कोई भी इसमें सफल नहीं हो पाता है। इसके बाद रावण स्वयं आता है। इस पर अंगद कहता है कि यदि पांव ही पड़ने हैं तो भगवान राम के पड़ो।
रावण अपने बेटे मेघनाद को राम की सेना से युद्ध के लिए भेजता है। अंत में मेघनाद अपनी शक्ति का प्रयोग कर लक्ष्मण को मूर्छित कर देता है। राम की सेना में शोक की लहर छा जाती है। सुषैण वैद्य के कहने पर हनुमान संजीवनी बूटी की पहचान न होने के कारण पूरा हिमालय उठाकर लेे आते हैं।
संजीवनी बूटी के उपचार से लक्ष्मण की मूर्छा टूट जाती है। रामलीला में मेघनाद की भूमिका में अनिल रावत व अंगद बने हिमांशु चौहान ने शानदार अभिनय किया।