विभाग के अधीक्षण पुरातत्वविद डा. केसी नौरियाल और संरक्षण सहायक मुदस्सर अली ने कण्वाश्रम क्षेत्र में वर्ष 2012 में निकली मूर्तियों का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान उनके साथ मौजूद रहे कण्वाश्रम विकास समिति के अध्यक्ष कमांडर बीएस रावत (से.नि.), महामंत्री आभा डबराल, मंत्री चंद्रप्रकाश नैथानी समेत कई लोगों ने टीम को बताया कि 2012 में मृग विहार के पास बाढ़ से हुए कटाव के दौरान ये मूर्तियां मिली थी। इनमें अधिकतर देव प्रतिमाएं और मंदिरों के स्तंभ थे। तब इसकी जानकारी पुरातत्व विभाग को दी गई थी।
पुरातत्व विभाग के साथ ही गढ़वाल विवि के पुरातत्व विभाग की टीम ने क्षेत्र का निरीक्षण किया, लेकिन इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई। समिति इस क्षेत्र में उत्खनन और खुदाई करने की मांग करती आ रही है। जानकारों का मानना है कि कण्वाश्रम के गर्भ में एक इतिहास छिपा है, जिसकी सच्चाई यहां खुदाई के बाद ही सामने आ सकती है।
पुरातत्व विभाग के संरक्षण सहायक मुदस्सर अली ने बताया कि समिति को पूरे क्षेत्र की पहचान करने को कहा गया है, ताकि संबंधित क्षेत्र में सर्वे और उत्खनन के लिए वन विभाग से अनुमति प्राप्त की जा सके। पुरातत्व अधिकारी वर्ष 2012 में किए गए सर्वे की रिपोर्ट का भी अध्ययन करेंगे। विभागीय टीम ने मृग विहार और इससे सटे जंगल का मुआयना किया, जहां तब देव प्रतिमाएं और मंदिर स्तंभ निकले थे। बताया जा रहा है कि 1991 में भी 36 मूर्तियां यहां खुदाई के दौरान निकली थी, जो देखरेख के अभाव में लापता हो गई।