बस में चढ़ने को मशक्कत करते लोग।
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कैंट की पार्किंग, पार्किंग शुल्क और प्रवेश शुल्क योजना के विरोध में पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत जयहरीखाल और डेरियाखाल के प्रधानों के आह्वान पर टैक्सी यूनियनों ने अपने वाहनों का संचालन जयहरीखाल और डेरियाखाल तक ही सीमित रखा। इससे कोटद्वार से आने वाले यात्रियों को लैंसडौन पहुंचने के लिए पांच किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ी। यही हाल गुमखाल से आने वाले यात्रियों का भी रहा।
जयहरीखाल में टैक्सी रुकने के कारण उन्हें लैंसडौन पहुंचने के लिए पैदल चलने को मजबूर होना पड़ा। जयहरीखाल प्रधान संघ के अध्यक्ष हरिमोहन रावत के नेतृत्व में प्रधानों अशोक, गिरीश नेगी, सुनीता देवी, अनूप रावत और डेरियाखाल में विनोद सिंह, विनोद रावत, राकेश सिंह, वीरेंद्र नेगी और सतेंद्र नेगी ने टैक्सी चालकों से निर्धारित स्थलों तक ही वाहन चलाने की अपील की थी।
अपील को मानते हुए टैक्सी चालकों ने निर्धारित स्थल तक ही वाहन संचालित किए। टैक्सियों के लैंसडौन न पहुंचने से लैंसडौन से कोटद्वार जाने वाली रोडवेज की बसों में यात्रियों की भीड़ रही। बसों में बैठने के लिए यात्री मारामारी करते नजर आए। टैक्सियों के न आने से नगर के बाजार में भी सन्नाटा पसरा रहा। व्यापारी भी दिन भर हाथ पर हाथ रख कर ग्राहकों की प्रतीक्षा करते रहे।