इस बार की आपदा ने डाडामंडी-जमेली मोटर मार्ग का कई स्थानों पर नामोनिशान मिटा दिया है। डाडामंडी से करीब चार किमी दूर लंगूरगाड नदी के किनारे-किनारे बनी यह सड़क दर्जनों जगहों पर क्षतिग्रस्त हो गई है, जिसके चलते सड़क से जुड़े दर्जनभर गांवों के लोग चार किलोमीटर पैदल आवाजाही करने को मजबूर हैं।
घने जंगल के बीच बसे इन गांवों के लोगों को रास्ते में वन्यजीवों का खतरा अलग से झेलना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन से उनकी सड़क की जल्द से जल्द मरम्मत कराने की मांग की है।
विकासखंड द्वारीखाल के डाडामंडी बाजार से जमेली तक के करीब दर्जनभर गांवों लोसण, डुंडेख, सिरई, जोली, जमेली, सैंज, मलेथा, जमेली महादेव, धारी, पाली, भैड़गांव, नौसिन और सीमबूबी को सड़क से जोड़ने वाली सड़क एक महीने से बाधित पड़ी है।
लंगूरगाड नदी के समानांतर बनी इस सड़क का कई स्थानों पर नामोनिशान मिट गया है। रपटे बह चुके हैं। लोग पैदल आवाजाही करने को मजबूर हैं। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को उठानी पड़ रही है। गर्भवती महिलाओं और मरीजों को ग्रामीण डंडी-कंडी के सहारे डाडामंडी तक पहुंचा रहे हैं।
सड़क बंद होने से जहां जीप टैक्सी और बसों का संचालन ठप है वहीं कोटद्वार से डाडामंडी-जमेली के लिए चलने वाली दैनिक रोडवेज सेवा भी डाडामंडी से ही कोटद्वार के लिए लौट जा रही है। धारी के प्रधान देवेंद्र सिंह रावत, कोमल सिंह, मनीष सिंह, श्याम सिंह रावत का कहना है कि सड़क बंद होने से लाइन लाइन ठप हो गई है। रोजमर्रा के काम के लिए बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को पैदल आने जाने में परेशानी उठानी पड़ रही है। विभाग ने अभी तक इसकी सुध नहीं ली है।
डाडामंडी से जमेली चार किमी मोटर मार्ग को आपदा से काफी नुकसान हुआ है। कई जगह रपटे बह गए हैं। इसकी मरम्मत का आगणन दो लाख रुपये का बनाकर शासन को भेजा गया है। बजट मिलते ही सड़क की मरम्मत करा दी जाएगी।
-एसपी उनियाल, सहायक अभियंता लोनिवि दुगड्डा