कोटद्वार। क्षेत्र के विभिन्न महाविद्यालयों में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की पूर्व संध्या पर कार्यक्रम आयोजित किए गए। पीजी कालेज कोटद्वार में आयोजित वाद-विवाद प्रतियोगिता में पीयूष सुंद्रियाल ने बाजी मारी। वहीं राजकीय महाविद्यालय, रिखणीखाल में आयोजित संगोष्ठी में मातृ भाषा की महत्ता, महत्व एवं योगदान पर चर्चा की गई।
पीजी कॉलेज कोटद्वार में एक भारत, श्रेष्ठ भारत क्लब की ओर से आयोजित वाद-विवाद प्रतियोगिता का शुभारंभ प्रभारी प्राचार्य डा. डीएम शर्मा ने किया। उन्होंने कहा कि मातृभाषा किसी भी व्यक्ति की सामाजिक व भाषायी पहचान है। यह हमें राष्ट्र से जोड़ती है और देश प्रेम की भावना से भर देती है। कार्यक्रम का संचालन करते हुए डा. तनु मित्तल ने अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला। कहा कि हम प्रतियोगिता में महाविद्यालय और बीएड स्ववित्त पोषित विभाग के छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। छात्र-छात्राओं ने ‘मातृभाषा व्यक्तित्व के विकास में सहायक है’ विषय के पक्ष एवं विपक्ष में विचार रखे। प्रतियोगिता में पीयूष सुंद्रियाल, अंबिका ध्यानी, आशीष केष्टवाल ने क्रमश: प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त किया। निर्णायक मंडल में इतिहास विभाग की विभागाध्यक्ष डा. रीटा शर्मा, हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डा. बिहारी लाल यादव व बीएड स्व वित्त पोषित विभाग के प्राध्यापक डा. अनिल मान शामिल रहे।
दूसरी ओर, भारत सिंह रावत राजकीय महाविद्यालय रिखणीखाल में आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि भाषा की मनुष्य के जीवन में अहम भूमिका है। भाषा के माध्यम से देश ही नहीं, बल्कि विदेशों के साथ संवाद स्थापित किया जा सकता है। इस मौके पर छात्र-छात्राओं ने लोक गीतों की प्रस्तुतियां भी दीं। संगोष्ठी में डॉ. विद्या रॉय, डॉ. अनूप सिंह मेवाड़, डॉ. महेशचंद्र आर्या, डॉ. सुरजीत सिंह कंडारी व डॉ. सरिता आदि ने विचार रखे।
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