कोटद्वार। गढ़वाल वन प्रभाग के पोखड़ा रेंज के अंतर्गत देवियोंखाल के जीआईसी डाबरी के पास मिले बाघ को वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्लूआईआई) देहरादून की टीम ने बुधवार रात को चिड़ियापुर रेस्क्यू सेंटर इलाज के लिए भेज दिया है। बाघ के अस्वस्थ होने का कारण अंदरूनी बीमारी बताई जा रही है। रेस्क्यू सेेंटर में उसका इलाज किया जा रहा है, डाक्टरों ने उसकी हालत सामान्य बताई है।
बुधवार सुबह रिखणीखाल ब्लाक के जीआईसी डाबरी जा रहे बच्चों ने पुल के नीचे झाड़ी में बाघ को देखा था। इसके बाद सूचना पर पहुंचे गढ़वाल वन प्रभाग की रेंज अधिकारी राखी जुयाल के नेतृत्व में वन कर्मियों ने बाघ की देखरेख की। रात के 11 बजे देहरादून से वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट की टीम मौके पर पहुंची। करीब एक घंटे तक चले रेस्क्यू के दौरान बाघ को ट्रैंकुलाइज कर बेहोश किया गया। इस दौरान देहरादून चिड़ियाघर से पहुंचे पशु चिकित्सक डा. राकेश कुमार नौटियाल और वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट के पशु चिकित्सक डा. अमित ध्यानी ने बाघ की जांच की। प्रारंभिक जांच में बाघ की उम्र 5-6 साल के बीच पाई गई। उसके पीछे के दोनों पैर काम नहीं कर रहे थे। पैर पर घिसटने के निशान मिले। शरीर पर अन्य किसी प्रकार के जख्म नहीं पाए गए। करीब 12 बजे रात बाघ को पिंजरे में डालकर चिड़ियापुर स्थित रेस्क्यू सेंटर ले जाया गया। जहां उसके बीमार होने की जांच के साथ इलाज किया जा रहा है।
उधर, गढ़वाल वन प्रभाग के डीएफओ संतराम ने बताया कि देवियोंखाल के जीआईसी डाबरी पास घायल हालत में मिले टाइगर को बेहोश कर चिड़ियापुर स्थित रेस्क्यू सेंटर भेज दिया गया है। उसके शरीर पर कहीं चोट के निशान नहीं पाए गए हैं। रेस्क्यू सेंटर में डाक्टरों की टीम उसके बीमार होने की जांच और उपचार कर रही है। बाघ की हालत सामान्य बताई गई है।
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