शासन की लापरवाही के चलते राजकीय बेस अस्पताल कोटद्वार की स्वास्थ्य सेवाएं वेंटिलेटर पर चल रही हैं। बेस अस्पताल प्रबंधन समिति की ओर से अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं के सफल संचालन के लिए वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए 04 करोड़ 30 लाख रुपये का बजट स्वीकृत कर शासन को भेजा गया है। लेकिन, चार माह होने के बाद अभी तक एक धेला भी अस्पताल को नहीं दिया गया है। अस्पताल की स्वास्थ्य सुविधाएं किसी प्रकार ओपीडी की पर्ची के पैसों से संचालित हो रही हैं।
मार्च 2018 में शासन ने कोटद्वार के संयुक्त चिकित्सालय को 300 बेड की सुविधाएं देने के बाद इसे बेस अस्पताल का दर्जा दे दिया था। लेकिन, बेस अस्पताल के मुताबिक बजट की व्यवस्था करना भूल गया। वर्तमान में कोटद्वार बेस अस्पताल में पौड़ी जिले की 80 फीसदी आबादी और यूपी के नगीना और नजीबाबाद तहसील क्षेत्र के मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं।
अस्पताल को संचालित करने के लिए करीब 04 लाख रुपये बिजली का बिल, 08 लाख जनरेटर, 01 करोड़ 49 लाख रुपये दवाई के लिए, 12 लाख रुपये संविदा कर्मियों के लिए और 25 लाख रुपये अस्पताल में भर्ती मरीजों के भोजन, सफाई आदि पर सालाना अनिवार्य रूप से खर्च होता है। इसके अलावा आधुनिक मशीनों को संचालित करने के लिए बजट की आवश्यकता होती है। गत वर्ष 03 करोड़ 90 लाख रुपये के बजट की डिमांड के सापेक्ष सरकार ने अस्पताल को एक करोड़ सात लाख रुपये देकर हाथ खड़े कर दिए थे। इस वर्ष चार माह से एक रुपया भी अस्पताल के खाते में नहीं डाले हैं।
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क्या कहते हैं अधिकारी
अस्पताल प्रबंधन समिति की बैठक में अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन के लिए चार करोड़ 30 लाख रुपये स्वीकृत कर शासन को भेजे गए थे। लकिन, अभी तक उन्हें एक रुपया तक नहीं मिला है। ओपीडी की पर्ची के सहारे किसी प्रकार अस्पताल का संचालन किया जा रहा है।
- डा. वीके शुक्ला, सीएमएस राजकीय बेस चिकित्सालय कोटद्वार
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