कोटद्वार। सनेह क्षेत्र के रामपुर में हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। दो हाथियों ने बुधवार रात को गांव में कई काश्तकारों की गेहूं की फसल रौंद डाली और आम के पेड़ भी तहस-नहस कर दिए। बृहस्पतिवार सुबह तक भी हाथी टस से मस नहीं हुए तो काश्तकारों ने शोर मचाकर हाथियों को जंगल में खदेड़ने का प्रयास किया। इस दौरान हाथी लोगों के पीछे दौड़ा। जिससे लोगों ने किसी तरह भागकर जान बचाई। सूचना पर पहुंचे वन कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद हाथियों को आबादी से दूर जंगल में खदेड़ने में सफलता हासिल की।
रामपुर निवासी मोहन सिंह रावत ने बताया कि बुधवार रात को बच्चे के साथ दो हाथी काश्तकार बालम सिंह नेगी के गेट से भीतर घुस गए, जिस पर उन्होंने शोर मचाकर किसी तरह हाथी को बाहर खदेड़ा। इसके बाद हाथी उनके खेत में पहुंचा और गेहूं की फसल रौंद डाली। बृहस्पतिवार सुबह तक हाथी खेतों में ही डटे रहे।
हाथियों ने काश्तकार कमल सिंह और पुष्कर सिंह के गेहूं की फसल रौंद डाली और आम के कई पेड़ भी क्षतिग्रस्त कर दिए। हाथियों को देखने के लिए लोगों की भीड़ जुट गई। हाथियों को जंगल में खदेड़ने का प्रयास किया गया, जिस पर हाथियों ने लोगों को खूब दौड़ाया। सूचना पर पहुंचे वनकर्मियों ने करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद हाथियों को आबादी क्षेत्र से दूर खदेड़ा।
काश्तकारों का कहना है कि क्षेत्र में पिछले दो माह से हाथियों का आतंक व्याप्त है। पूर्व में हाथी रात को गेहूं की फसल रौंदने के बाद सुबह होते ही वापस जंगल में लौट जाते थे, लेकिन बृहस्पतिवार को हाथी सुबह 7:30 बजे तक खेतों में खड़ी गेहूं की फसल को खाते व रौंदते रहे। हाथियों के आतंक के कारण जानमाल की सुरक्षा का खतरा भी बना हुआ है।
रेंजर बिपिन चंद्र जोशी ने बताया कि रात तीन बजे स्टाफ ने मौके पर पहुंचकर हाथियों को जंगल में खदेड़ दिया था, लेकिन हाथी पुन: आबादी क्षेत्र में धमक गए और वहां से नहीं हटे। वन कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद हाथियों को सुबह आबादी क्षेत्र से दूर जंगल में खदेड़ा। क्षेत्र में वन कर्मियों की गश्त की जा रही है।