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Kotdwar News: चूना महेड़ा में आपदा प्रभावितों के पास न खाने को राशन और न पहनने के लिए कपड़े

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संवाद न्यूज एजेंसी
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कोटद्वार। दुगड्डा ब्लॉक के दूरस्थ गांव चूना महेड़ा में आठ अगस्त की रात आई आपदा के एक सप्ताह बाद भी आपदा प्रभावितों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। स्थिति यह है कि आपदा प्रभावितों के पास न तो खाने के लिए राशन है और ना ही पहनने के लिए कपड़े। एक सप्ताह बाद भी गांव में बिजली और पानी की आपूर्ति बहाल नहीं हो पाई है। गांव के लापता वृद्ध का भी अभी तक नहीं पता नहीं चल पाया है।
जिला सहकारी बैंक के डायरेक्टर रविंद्र सिंह बिष्ट और ग्रामीण राजेश कुकरेती ने बताया कि आपदा में चूना महेड़ा गांव में बबली देवी, मंजू देवी, प्रर्मिला देवी, गोविंद प्रसाद, रहमत अली, अक्कुमुद्दीन, धीरेंद्र, रमेश, मनोहरी आदि लोगों के मकान मलबे में दब गए थे। जबकि अन्य 10 घर क्षतिग्रस्त हो गए थे। प्रशासन की टीम ने प्रभावित परिवारों को जो राशन उपलब्ध कराया था, वह खत्म हो गया है और कई लोगों के पास पहनने के लिए कपड़े तक नहीं है। वहीं, किमसेरा के उमर बाड़ियों तोक, जुड्डा रौडियाल, फलिंडाखेत में कई नाली सिंचित व असिंचित भूमि बाढ़ में बह गई है।
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कण्वाश्रम पौखाल मोटर मार्ग पर जुड्डा गांव में एकमात्र पैदल पुल की एप्रोच बह गई है। जिससे मालन घाटी में जरूरी सामान की आपूर्ति बंद है। लोग नदी में उतरकर आवाजाही करने के लिए मजबूर हैं। कहा कि चूना महेड़ा-नाथूखाल और पौखाल कण्वाश्रम मार्ग बंद होने से उन्हें पौखाल और नाथूखाल बाजार तक पहुंचने के लिए आठ से 10 किमी. पैदल आवाजाही करनी पड़ रही है। उन्होंने प्रशासन क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से आपदा प्रभावित परिवारों की मदद करने की अपील की है।
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प्रशासन की ओर से पहले भी प्रभावित परिवारों को राशन उपलब्ध कराई गई थी। पुन: प्रभावित परिवारों को राशन उपलब्ध कराई जा रही है।
- मनोहर सिंह, प्रभारी नायब तहसीलदार कोटद्वार।
फोटो समाचार
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