कार्बेट के पाखरो जोन में टाइगर सफारी क्षेत्र में निर्माण कार्यों का निरीक्षण करती सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) ने मंगलवार को कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) के कालागढ़ टाइगर रिजर्व वन प्रभाग (केटीआर) के अंतर्गत पाखरों में निर्माणाधीन टाइगर सफारी परिसर का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने अवैध पातन और निर्माण से संबंधित पत्रावलियां तलब की।
कार्बेट के कालागढ़ वन प्रभाग के पाखरो रेंज में निर्माणाधीन टाइगर सफारी के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के वकील गौरव कुमार बंसल की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। कोर्ट की ओर से इस संबंध में पीवी जयकृष्णन की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय सीईसी का गठन किया गया है। टीम की ओर से मंगलवार को टाइगर सफारी के निर्माण से जुड़े मामले में अनियमितताओं की जांच की गई। कमेटी के अध्यक्ष पीवी जयकृष्णन, सदस्य सचिव अमानाथ शेट्टी और सदस्य महेंद्र व्यास को वन अधिकारियों ने अब तक ध्वस्त किए गए अवैध निर्माण की जानकारी दी।
सीईसी के निरीक्षण के दौरान गढ़वाल के मुख्य वन संरक्षक गढ़वाल सुशांत पटनायक, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक मधुकर धकाते, कार्बेट के निदेशक राहुल कुमार, राजाजी नेशनल पार्क के निदेशक अखिलेश तिवारी, केटीआर के डीएफओ प्रकाश आर्य, लैंसडौन के डीएफओ अमरेश कुमार आदि शामिल थे।
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कब क्या हुआ
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) प्रशासन गत 20 मार्च की रात कालागढ़ टाइगर रिजर्व वन प्रभाग (केटीआर) के अंतर्गत पाखरो-कालागढ़ मार्ग पर टाइगर सफारी में सुगम आवाजाही के लिए बनाई गई पांच पुलिया ध्वस्त कर चुका है, जबकि इससे पूर्व अवैध निर्माण में शुमार पाखरो और मोरघट्टी में चार-चार कुल आठ भवन ध्वस्त किए जा चुके हैं। वन अधिकारियों के अनुसार ये सभी निर्माण एनटीसीए की ओर से अवैध निर्माण में शामिल किए गए थे। मामले में विभागीय जांच के बाद शासन ने तत्कालीन डीएफओ किशनचंद को जहां मुख्यालय अटैच किया हुआ है, वहीं एक रेंज अधिकारी बीबी शर्मा पर निलंबन की गाज गिर चुुकी है।