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बिना बिजली के कैसे चलेंगे कंप्यूटर

Sun, 28 Aug 2016 09:31 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला कोटद्वार
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सूचना क्रांति के इस दौर में कंप्यूटर शिक्षा के बिना आगे बढ़ना मुमकिन नहीं है। ऐसे में प्रदेश के शिक्षा विभाग की ओर से सरकारी विद्यालयों में आधुनिक शिक्षा के नाम पर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है।
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विभाग सरकारी जूनियर हाईस्कूल और माध्यमिक विद्यालयों में बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा देने के दावे तो कर रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि अधिकतर विद्यालयों के कंप्यूटर मात्र शोपीस बने हुए हैं।

विभागीय आंकड़ों पर नजर डालें तो पौड़ी जिले के सात ब्लाकों में 44 विद्यालयों में बिजली की व्यवस्था न होने पर कक्षा आठ से 12वीं तक के बच्चों ने अभी तक कंप्यूटर के दर्शन तक नहीं किए। 50 प्रतिशत विद्यालयों के कंप्यूटर खराब होकर घूल फांक रहे हैं।
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शिक्षा विभाग ने वर्ष 2001 से 2004 तक सरकारी स्कूलों में आधुनिक शिक्षा के नाम पर कंप्यूटर भिजवाए थे। विभाग ने शिक्षकों को दस दिन का कंप्यूटर प्रशिक्षण कराया और 500 एमबी रैम वाले इन कंप्यूटरों से बच्चो को कंप्यूटर एजुकेशन की जिम्मेदारी दे दी।

नतीजतन 500 एमबी रैम के कंप्यूटर ज्यादा दिन तक लोड नहीं उठा पाए और खराब होने लगे। शिक्षकों ने बच्चों से कंप्यूटर फीस में अपने पैसे जोड़कर मरम्मत भी कराई, लेकिन वे कामयाब नहीं हुए।

वर्तमान में दुगड्डा, द्वारीखाल, नैनीडांडा, जयहरीखाल, बीरोखाल, रिखणीखाल और यमकेश्वर ब्लाकों में 28 जूनियर हाईस्कूल और 16 इंटर कालेजों में बिजली की व्यवस्था न होने से कंप्यूटर डिब्बों में बंद हैं। करीब 50 प्रतिशत विद्यालयों के कंप्यूटर धूल फांक रहे हैं।

इन विद्यालयों में है कंप्यूटर शिक्षा ठप  
ब्लाक           जूनियर     माध्यमिक
दुगड्डा           05          02
जयहरीखाल      01          01
यमकेश्वर        05          03
द्वारीखाल         07          01
रिखणीखाल      03          01
बीरोखाल         06          02
नैनीडांडा         01          06

यह बात सही है कि कुछ विद्यालयों में बिजली के कनेक्शन न होने के कारण बच्चे कंप्यूटर शिक्षा नहीं ले पा रहे हैं। विद्युत कनेक्शन के लिए ऊर्जा निगम के पास पैसा जमा किया गया है। खराब कंप्यूटर की मरम्मत के लिए विद्यालय अपना फंड का उपयोग कर सकते हैं।
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-मदन सिंह रावत, मुख्य शिक्षा अधिकारी पौड़ी
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