पहाड़ से लेकर मैदानी इलाके तक होली के रंग में रंगने लगा है। कोटद्वार भाबर में कई जगह होली मिलन कार्यक्रम आयोजित किए गए, वहीं पर्वतीय क्षेत्र में भी होल्यार पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ होली के गीतों पर झूम रहे हैं। गोविंदनगर में चालाक डॉक्टर और स्याना मरीज समेत कई हास्य नाटक का मंचन किया गया।
संस्कृति विभाग की ओर से आशु कला समिति की ओर से बैठकी और खड़ी होली का आयोजन किया गया, जिसमें लोक गायिका सुमित्रा रावत ने एक से बढ़कर एक होली गीतों की प्रस्तुति दी। उन्होंने हर हर पीपल पात जय देवी आदि भवानी..., फागुण मैना खेल्या होली..., फूलों से मथुरा छाई रही..., ऋतु कु राजा बसंत एगे, डांडी कांठ्यूं मां मोल्यार एगे... आदि होली के गीतों की प्रस्तुति दी। होल्यारों ने ढोल दमाऊं की थाप पर थिरकते हुए बलभद्रपुर और रतनपुर में घर-घर जाकर होली मनाई। इस अवसर पर लोक गायक योगेंद्र, संजय सिंह, ढोल पर परमानंद, दमाऊं में राहुल अधिकारी, तबला में गणेश, शिवानी भट्ट, अनुष्का कुकरेती, आरती केष्टवाल, शोभा देवी आदि मौजूद रहे।
गोविंदनगर के गीता भवन उत्सव समिति की ओर से गीता मंदिर, गोविंदनगर में रंग एकादशी पर्व के उपलक्ष्य में होली मिलन कार्यक्रम आयोजन किया गया। महिलाओं ने होली के गीत गाए और एक दूसरे को गुलाल लगाकर होली खेली। संगीता अग्रवाल, पूनम जैन, मुक्ता अग्रवाल, सुधा अग्रवाल ने चालाक डॉक्टर और स्याना मरीज, नई सास पुरानी बहू आदि हास्य नाटकों का मंचन भी किया। अमिता गर्ग ने कृष्ण के भजन पर एकल नृत्य प्रस्तुत किया, जिसे खूब सराहा गया। वहीं, सतपुली में होल्यारों ने नगर क्षेत्र में पारंपरिक नृत्य एवं होली गीतों के साथ होली मनाई। होल्यारों ने नगर के विभिन्न मार्गों पर खड़ी होली और घर-घर जाकर बैठकी होली मनाई।