आठ वर्षों में मेडिकल कालेज में संविदा या कार्यवाहक प्राचार्यों के भरोसे चल रहा है। इसका सीधा असर प्रशासनिक एवं वित्तीय व्यवस्थाओं पर पड़ रहा है।
वर्ष 2008 में प्रदेश शासन ने बेस अस्पताल को उच्चीकृत मेडिकल एवं रिसर्च कालेज का दर्जा दिया था। शुरुआती दौर में कुछ माह बेस अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक ने प्राचार्य/डीन का अतिरिक्त प्रभार देखा। उनके बाद से अब तक संविदा वाले पूर्णकालिक प्राचार्य या संविदा वाले कार्यवाहक प्राचार्य कालेज की व्यवस्था देखते आ रहे हैं। शासन कालेज के वरिष्ठ प्रो. को कार्यवाहक प्राचार्य की जिम्मेदारी देकर काम चलाता आ रहा है।
10 फरवरी को शासन ने प्रो. आरसी पुरोहित को भी कार्यवाहक प्राचार्य के रूप में तैनात किया, लेकिन उन्होंने भी अगले दिन इस्तीफा दे दिया। ऐसे में एक बार फिर कालेज के मुखिया पद पर अनिश्चय की की स्थिति बन गई है। चिकित्सा शिक्षा विभाग के निदेशक डा.आशुतोष सयाना का कहना है कि मेडिकल कालेज श्रीनगर हमारी प्राथमिकता में है। जल्द ही प्राचार्य की नियुक्ति कर दी जाएगी।