कोटद्वार। लॉकडाउन बढ़ाने की घोषणा के बाद कोटद्वार में फंसे यूपी के महाराजगंज जिले के मजदूरों का हौसला जवाब दे गया। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में रह रहे मजदूर मंगलवार को बड़ी संख्या में तहसील पहुंचे। उन्होंने एसडीएम से उन्हें राशन देने या फिर घर जाने की अनुमति देने की गुहार लगाई। मजदूरों का कहना है कि ध्याड़ी मजदूरी न मिलने से उनके पास खाने के लिए राशन भी नहीं है। ऐसे में प्रशासन उन्हें घर जाने की अनुमति प्रदान कर दे तो वे कम से कम खेतीबाड़ी से अपना गुजारा कर लेंगे।
यूपी के महाराजगंज के विभिन्न गांवों के करीब 300 मजदूर कोटद्वार के गाड़ीघाट, लकड़ीपड़ाव, गिंवईस्रोत व काशीरामपुर तल्ला सहित विभिन्न क्षेत्रों में किराए में रह रहे हैं। मंगलवार को वे तहसील पहुंचे और एसडीएम से उन्हें वापस उनके घर भेजने की अनुमति प्रदान करने की मांग की। कहा कि वे यहां रहकर मजदूरी कर जीविकोपार्जन करते हैं। लॉकडाउन के कारण उनका काम धंधा चौपट हो गया है। हालत यह है कि मजदूरों के पास जमा पूंजी खर्च हो चुकी है और अब उनके पास न तो खाने के लिए राशन है और न ही चूल्हा जलाने के लिए गैस ही उपलब्ध है। श्रमिक धर्मेंद्र, संदीप, सरवर, रामसेवक, चंद्रप्रकाश, गोपाल, राहुल, बैजनाथ, राजू आदि मजदूरों ने कहा कि लॉकडाउन के चलते अब उनके समक्ष भुखमरी की नौबत आ गई है। उन्होंने बताया कि प्रशासन ने उन्हें गत 31 मार्च को पांच किलो आटा, पांच किलो चावल, एक किलो दाल उपलब्ध कराई थी, लेकिन वे एक कमरे में छह से नौ लोग रह रहे हैं। इतने कम राशन से उनका गुजारा तक नहीं हो पा रहा है। मजदूरों ने कहा कि यदि प्रशासन उन्हें राशन उपलब्ध नहीं करा सकता है तो उन्हें उनके गांव जाने की अनुमति प्रदान करे। यदि प्रशासन उन्हें घर भेजने की व्यवस्था नहीं कर सकता तो वे पैदल ही अपने गांव चले जाएंगे।
एसडीएम योगेश मेहरा ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान मजदूरों को उनके गांव भेजना संभव नहीं है। उन्होंने मजदूरों को राशन उपलब्ध कराने का भरोसा दिया। एसडीएम के निर्देश पर राजस्व और पूर्ति विभाग के अधिकारियों ने राशन देने के लिए मजदूरों की लिस्ट बनानी शुरू की।
-फोटो