हल्द्वानी मेडिकल कालेज में संकाय सदस्यों (फैकल्टी) की कमी की वजह से एमबीबीएस की मान्यता में पेच फंसने से श्रीनगर मेडिकल कालेज में भी हलचल तेज हो गई है। एमसीआई (भारतीय चिकित्सा परिषद) कहीं श्रीनगर मेडिकल कालेज की मान्यता पर भी सवाल न खड़ा कर दे, इसे देखते हुए रिक्त पदों को भरने की कार्रवाई फिर शुरू हो गई है।
मालूम हो कि हर पांच साल में एमसीआई एमबीबीएस की मान्यता का नवीनीकरण करती है। एमसीआई की टीम नवंबर/दिसंबर माह में हल्द्वानी मेडिकल कालेज में मान्यता के नवीनीकरण के लिए दौरा कर सकती है। बताया जा रहा है कि दौरे से पूर्व किसी ने एमसीआई को फैकल्टी की कमी की शिकायत कर दी, जिसके चलते मान्यता में पेच फंस गया है।
हालांकि श्रीनगर मेडिकल कालेज में मान्यता का नवीनीकरण वर्ष 2018 में होना है, लेकिन सूत्रों का मानना है कि अब एमसीआई की टीम यहां अचानक कभी भी पहुंच सकती है। यहां भी संकाय सदस्यों की कमी प्रमुख समस्या बनी हुई है, जिससे श्रीनगर मेडिकल कालेज की मान्यता पर भी सवाल खड़ेे हो जाएंगे, क्योंकि एमसीआई संकाय सदस्यों की सिर्फ 10 फीसदी कमी को स्वीकार करती है।
श्रीनगर मेडिकल कालेज की समस्या यह है कि यहां कतिपय विभागों में रिक्त पदों की संख्या 50 फीसदी से ऊपर है। यहां न्यूरोसर्जरी, नेफ्रोलाजी, कार्डियोलॉजी और टीबी एंड चेस्ट विभाग तो पूर्ण रुप से खाली है। जबकि बाल रोग, स्त्री रोग एवं प्रसूति, कान-नाक-गला रोग, जनरल मेडिसिन, नेत्र रोग, कैंसर, रेडियोडाइग्नोसिस और हड्डी रोग विभाग में चिकित्सकों की काफी कमी है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि कुछ माह पूर्व तक लगभग हर माह शासन/निदेशालय स्तर पर संकाय सदस्यों की संविदा पर नियुक्ति के लिए साक्षात्कार लिए जाते थे। इस प्रक्रिया के माध्यम से एक-दो चिकित्सक मिल ही जाते थे, लेकिन इसके स्थगित होने से स्थिति खराब हो गई। जबकि इस बीच लगभग 16 संकाय सदस्य यहां से अन्यत्र चले गए।
20 को होंगे साक्षात्कार
साक्षात्कार की प्रक्रिया रुटीन कार्रवाई है। संकाय सदस्यों के पद खाली हैं, इसलिए विज्ञप्ति जारी की जा रही है। 20 अक्तूबर को चिकित्सा शिक्षा निदेशालय में संविदा में नियुक्ति हेतु साक्षात्कार आयोजित किया जाएगा। - प्रो. सीएम रावत, प्राचार्य मेडिकल कालेज श्रीनगर