मानसून का कहर आबादी क्षेत्र के साथ-साथ जंगलों में रहने वाले गुर्जर परिवारों को भी परेशान कर रहा है। लैंसडौन वन प्रभाग के कोटद्वार रेंज में उफनाकर बह रहे सिगड्डी स्रोत नदी से गुर्जर बस्ती को खतरा पैदा हो गया है। उफनाए सिगड्डी स्रोत नदी का मलबा गुर्जरों के घरों में घुस गया। गुर्जरों ने वन विभाग से नदी का रुख डायवर्ट करने की मांग की है। सूचना मिलने पर राजस्व और वन विभाग के अधिकारियों ने सिगड्डी स्रोत में गुर्जर बस्ती का निरीक्षण किया।
लैंसडौन वन प्रभाग के लालढांग रेंज और कोटद्वार रेंज के बीच की सीमा में बरसाती नदी सिगड्डी स्रोत हर मानसून में तबाही मचाती है। कोटद्वार रेंज के कंपार्टमेंट 19 में परमिटधारी गुर्जरों का परिवार कई सालों से समूह में रहता है। गत दो वर्षों से इन वन गुर्जरों के लिए सिगड्डी स्रोत नदी आपदा का सबब बनी है।
शमशाद, रोशनदीन, यामीन, मसरदीन, मोहम्मद कासिम, मो. युसुफ, ईनाम अली, सराजुद्दीन, अमीर हमजा, मो. हमजा, मो. रफी, इरफान और मो. वजीर का कहना है कि गत वर्ष की बरसात में उफनाई सिगड्डी स्रोत नदी का रुख गुर्जरबस्ती की ओर हो गया है, जिससे उनके घरों में मलबा और बाढ़ का पानी घुस रहा है। कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश से वर्तमान में भी सिगड्डी स्रोत उफनाकर बह रहा है। दो दिन पहले हुई मूसलाधार बारिश और उफनाए सिगड्डी स्रोत से उनकी गुर्जर परिवारों के करीब 15 डेरे मलबे से पट गए। जिसका राजस्व निरीक्षक चित्र सिंह रावत और रेंज अधिकारी बृजविहारी शर्मा ने स्थलीय निरीक्षण किया लेकिन प्रभावित परिवारों को न तो कुछ मदद मिली, न ही आपदा का कारण बन रही सिगड्डी स्रोत नदी का रुख ही डायवर्ट किया गया है। सिगड्डी क्षेत्र के नगर निगम पार्षद जगदीश मेहरा का कहना है कि भारी बारिश में गुर्जर परिवार जंगल के बीच डरे सहमे हुए रह रहे हैं।
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सिगड्डी स्रोत नदी से गुर्जर डेरों को खतरा बना हुआ है। यहां पर नदी के डायवर्ट करने और डेरों में मलबा भरने से हुए नुकसान की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को दी गई है।
-बृजविहारी शर्मा, रेंज अधिकारी कोटद्वार
चंद्रमोहन शुक्ला