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Kotdwar News: सरकारी कार्यालय अन्यत्र शिफ्ट, व्यापार सिमटा

Sat, 14 Feb 2026 05:42 PM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
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लैंसडौन की व्यापारिक गतिविधियों को लगा ग्रहण, व्यापारी त्रस्त
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लैंसडौन। सरकारी कार्यालयों के अन्यत्र शिफ्ट हो जाने से लैंसडौन की वाणिज्यिक गतिविधियां सिमटती जा रही है। इसका सीधा असर पलायन के रूप में सामने आ रहा है।
लैंसडौन में सेना के आने से पहले क्षेत्र बिल्कुल वीरान था। सेना द्वारा अल्मोड़ा से व्यापारियों को बसाया गया था। लैंसडौन के व्यापारी दुगड्डा से ही राशन, कपड़ा, खच्चरों-घोड़ों का चारा खच्चरों- ऊंटों आदि में भरकर लाते थे जिस क्षेत्र में बनिया जाति के लोगों के लिए दुकानें खोली गईं। वह क्षेत्र बनिया बाजार के नाम से जाना गया। कुछ दुकानें गोरखा बटालियन की बैरकों के निकट खोली गईं। इन्हें कबाड़ी बाजार के नाम से जाना गया। 1930-40 तक दुकानों ने पूरी तरह से विस्तृत बाजार का रूप ले लिया। सेना का बाजार होने के कारण इसे सदर बाजार से जाना गया। 1980 के दशक के अंत तक यहां का व्यापार बढ़ता गया।
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वर्ष 1990 में सैनिकों की आवश्यकताओं को देखते हुए गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर द्वारा अपने परिसर में वेट केंटीन, जनरल स्टोर, शॉपिंग कांप्लेक्स बनवाए गए। इसके बाद सैनिकों की बाजार में आवाजाही कम होती गई। ग्रामीण क्षेत्रों में भी दुकानें खुलने का असर लैंसडौन के बाजार पर पड़ा। रही-सही कसर कार्यालयों के अन्यत्र शिफ्ट होने से पूरी हो गई। इससे अब गिने-चुने लोग ही खरीदारी करते बाजार में नजर आते हैं। अब तो सुरेंद्र अग्रवाल, गोपीचंद, महबूब आलम, सलीम रहमान समेत कई दुकानदार कहने लगे हैं कि वीकेंड पर पर्यटकों के आने पर ही बाजार में ग्राहक नजर आते हैं। अन्य दिन दुकानदार ग्राहकों के लिए तरस जाते हैं।
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