उत्तराखंड की सबसे बड़ी निजी परिवहन कंपनी जीएमओयू ने कोरोना संकटकाल में एक साल का टैक्स और बीमा माफ न करने की दशा में अपने 93 बसों के परमिट परिवहन विभाग में जमा करवा दिए हैं। अगले दो दिनों में पौड़ी के साथ ही रुद्रप्रयाग और चमोली जिले में भी कंपनी बड़ी संख्या में अपने वाहनों के परमिट सरेंडर करवाएगी। जीएमओयू के सख्त रुख को देखते हुए पहाड़ में परिवहन व्यवस्था पटरी पर लौटने के आसार नहीं लग रहे हैं।
गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के पर्वतीय क्षेत्रों में जीएमओयू, टीजीएमओयू, केएमओयू समेत दर्जनभर निजी परिवहन कंपनियां परिवहन व्यवस्था संभालती हैं, लेकिन कोरोना संक्रमणकाल में 21 मार्च से इन वाहनों के पहिए जाम हैं। करीब 400 बसों के बेड़े वाली जीएमओयू का मुख्यालय कोटद्वार में है, जहां कंपनी ने शनिवार तक 93 बसों के परमिट, रजिस्ट्रेशन और फिटनेस के दस्तावेज उपसंभागीय परिवहन कार्यालय कोटद्वार में जमा करवा दिए हैं। अगले दो दिनों में कोटद्वार के साथ ही पौड़ी, रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों में भी बड़ी संख्या में बसों के परमिट सरेंडर कराने की तैयारी है।
कोट
कंपनी ने 95 फीसदी बसों के परमिट सरेंडर करने का निर्णय ले लिया है। सरकार ने बसों का किराया तो बढ़ा दिया है, लेकिन इस किराए पर लोग सफर करने को तैयार नहीं हैं। बस मालिकों के लिए बसें चलाना नुकसान का सौदा साबित होने लगा है। जीएमओयू पुरानी दरों पर ही बसें चलाने को तैयार है, लेकिन सरकार को पूरे साल का टैक्स और बीमा माफ करना होगा। - जीत सिंह पटवाल, अध्यक्ष, जीएमओयू, कोटद्वार।